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नीट मामले पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय (Vijay) का बड़ा बयान- “नीट को पूरी तरह खत्म किया जाए”, राहुल गांधी की हिरासत की भी की कड़ी निंदा

इंडियन व्यू टीम/ चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में हाल ही में नई ऊर्जा के साथ सत्ता में आए मुख्यमंत्री और ‘तमिझागा वेत्री कज़गम’ (TVK) के प्रमुख विजय (Thalapathy Vijay) ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। चेन्नई में एक आपातकालीन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने मांग की है कि देश भर में नीट परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त (Abolish) किया जाए और शिक्षा को पुनः पूरी तरह से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में लौटाया जाए।

‘नीट सामाजिक न्याय के खिलाफ है’

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि नीट जैसी केंद्रीकृत परीक्षाएं ग्रामीण, गरीब और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को कुचलने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “नीट कोई परीक्षा नहीं, बल्कि एक कमर्शियल कोचिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने का जरिया बन चुकी है। हाल ही में सामने आए व्यापक पेपर लीक और घोटालों ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) एक पारदर्शी परीक्षा आयोजित कराने में पूरी तरह विफल रही है। तमिलनाडु की जनता की ओर से हमारी मांग है कि राज्यों को अपनी खुद की प्रवेश प्रक्रिया तय करने की आजादी दी जाए।”

राहुल गांधी की हिरासत की निंदा

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य सांसदों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना की भी कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विपक्ष के नेता और जनप्रतिनिधियों को छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। केंद्र सरकार द्वारा पुलिस के दम पर विपक्ष की आवाज को दबाना और सांसदों को सड़क पर घसीटना लोकतंत्र के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।”

तमिलनाडु विधानसभा में नए प्रस्ताव की तैयारी

इंडियन व्यू टीम के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय की सरकार आने वाले दिनों में तमिलनाडु विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जिसमें केंद्र सरकार से राज्य को नीट के दायरे से पूरी तरह छूट (Exemption) देने और नीट को राष्ट्रीय स्तर पर रद्द करने के लिए एक सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया जाएगा। दक्षिण भारत से उठे इस कड़े विरोध के स्वर ने नीट मुद्दे पर केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

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