दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम: सीजेपी (CJP) छात्रों के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर 24 जुलाई को सुनवाई करेगा

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: देश की राजधानी में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और शिक्षा सुधारों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्रों का पिछले कई हफ्तों से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन, पुलिसिया कार्रवाई, और आम जनता को हो रही असुविधा की न्यायिक जांच की मांग वाली एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) को स्वीकार कर लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए 24 जुलाई को इस पर विस्तृत सुनवाई की तारीख तय की है।
याचिका में क्या उठाये गए हैं मुद्दे?
- यह जनहित याचिका अधिवक्ता और नागरिक अधिकार संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है। याचिका में दो प्रमुख मोर्चों पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है:
- 1. छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा: याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अनुचित और बर्बर बल प्रयोग (लाठीचार्ज व वाटर कैनन) किया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पुलिस अधिकारियों की इस कार्रवाई की सेवानिवृत्त जज की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए।
- 2. सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा: दूसरी ओर, लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक जाम, मेट्रो स्टेशनों के बार-बार बंद होने और व्यापारियों को हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह छात्रों के प्रदर्शन के लिए एक वैकल्पिक और निर्दिष्ट स्थान (जैसे रामलीला मैदान) तय करने के निर्देश दे।
दिल्ली पुलिस और सरकार का पक्ष
उच्च न्यायालय के रुख को देखते हुए दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय ने भी अपना पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस का तर्क है कि छात्र कई बार जंतर-मंतर के निर्धारित सुरक्षा घेरे (बैरिकेड्स) को तोड़कर संसद भवन और वीवीआईपी इलाकों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जिससे राजधानी की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा था। पुलिस का दावा है कि बल प्रयोग केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतिम विकल्प के रूप में किया गया था।
संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 24 जुलाई को होने वाली यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। दिल्ली हाईकोर्ट को एक तरफ नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) और दूसरी तरफ सार्वजनिक व्यवस्था व सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। इस याचिका पर आने वाला कोई भी अंतरिम आदेश या दिशा-निर्देश जंतर-मंतर पर जारी इस लंबे छात्र आंदोलन के भविष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।



