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केंद्र सरकार ने साइबर सुरक्षा और एआई (AI) अनुसंधान के लिए देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को अतिरिक्त फंड जारी करने की दी मंजूरी

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: भारत को डिजिटल तकनीक और नवाचार (Innovation) के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति (Global Superpower) बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों, विशेषकर आईआईटी (IITs), एनआईटी (NITs) और आईआईएससी (IISc) बेंगलुरु को साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अनुसंधान के लिए करोड़ों रुपये का ‘अतिरिक्त विशेष फंड’ जारी करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।

डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) की ओर कदम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, आज के समय में दुनिया का अगला बड़ा युद्ध हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा और एल्गोरिदम के माध्यम से लड़ा जाएगा। इस फंड का मुख्य उद्देश्य ‘स्वदेशी एआई मॉडल’ (Indigenous AI Models) विकसित करना और भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे बैंकिंग सिस्टम, पावर ग्रिड और सरकारी डेटाबेस) को रैनसमवेयर और हैकिंग जैसे वैश्विक साइबर हमलों से बचाने के लिए नई सुरक्षा दीवारें तैयार करना है।

स्टार्टअप्स और रिसर्च स्कॉलर्स को मिलेगा फायदा

यह फंड केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा इन संस्थानों में शोध कर रहे पीएचडी छात्रों और ‘डीप-टेक’ (Deep-Tech) स्टार्टअप्स को अनुदान (Grants) के रूप में दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि भारत एआई टूल्स के लिए अमेरिका या चीन पर निर्भर न रहे, बल्कि हमारे युवा वैज्ञानिक भारत की बहुभाषी आबादी (Multilingual Population) और कृषि तथा स्वास्थ्य जैसे स्थानीय क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से ‘मेड इन इंडिया’ एआई समाधान तैयार करें।

साइबर अपराधों पर भी लगेगी लगाम

इस अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण पहलू घरेलू साइबर अपराधों, जैसे डीपफेक (Deepfake) वीडियो, ऑनलाइन ठगी और परीक्षा प्रणालियों (डिजिटल पेपर लीक) में होने वाली हैकिंग को रोकने के लिए ‘प्रेडिक्टिव एआई’ (Predictive AI) टूल्स विकसित करना भी है। इंडियन व्यू टीम के तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी-भरकम फंड के आवंटन से भारत के शैक्षिक संस्थानों में ‘ब्रेन ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) रुकेगा और शोधकर्ताओं को भारत में रहकर ही विश्वस्तरीय लैब और संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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