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रियल एस्टेट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ (Parsvnath) बिल्डर्स को खरीदारों का पैसा एक हफ्ते में लौटाने का दिया अल्टीमेटम, अन्यथा जेल जाने की दी चेतावनी

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: देश के रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) में अपने घर का सपना टूटने का दर्द झेल रहे हजारों होम-बायर्स (घर खरीदारों) के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने एक लंबे समय से लंबित आवासीय परियोजना विवाद में देश के जाने-माने ‘पार्श्वनाथ (Parsvnath) बिल्डर्स’ को सख्त अल्टीमेटम दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि बिल्डर एक सप्ताह के भीतर उन सभी 70 खरीदारों का पूरा पैसा ब्याज सहित वापस लौटाए जिन्हें तय समय-सीमा बीत जाने के बावजूद फ्लैट्स का पजेशन (कब्जा) नहीं दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद पार्श्वनाथ डिवेलपर्स की ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ (Parsvnath Exotica) परियोजना से जुड़ा है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित है। इन खरीदारों ने साल 2007 से 2009 के बीच फ्लैट बुक कराए थे और लाखों रुपये का भुगतान किया था। बिल्डर ने तीन साल में पजेशन देने का वादा किया था, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी परियोजना अधूरी पड़ी है। इससे पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने भी खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिल्डर को पैसे वापस करने का आदेश दिया था, जिसे बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

‘बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी’

सुनवाई के दौरान पार्श्वनाथ के वकीलों ने मंदी और फंड की कमी का हवाला देते हुए अदालत से और समय मांगा। लेकिन न्यायमूर्ति की पीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “खरीदार आपके आर्थिक हालातों का खामियाजा क्यों भुगतें? उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई आपको दी है। अगर आप अगले एक सप्ताह (सात दिनों) के भीतर तय धनराशि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा नहीं करते हैं, तो कंपनी के निदेशकों (Directors) को अवमानना (Contempt of Court) के आरोप में सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया जाएगा।”

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा नज़ीर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 70 खरीदारों की कुल मूल राशि के साथ उन्हें 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी चुकाना होगा। इंडियन व्यू टीम के कानूनी जानकारों का कहना है कि यह आदेश पूरे देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है। यह फैसला उन सभी बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश है जो ग्राहकों का पैसा लेकर परियोजनाओं को सालों तक अटकाए रखते हैं। इस फैसले से घर खरीदारों (Homebuyers) का न्यायपालिका में विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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