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गाजा में ‘मौत का सन्नाटा’: दवा और बिजली के अभाव में अधिकांश अस्पताल हुए बंद, हजारों मरीजों की सांसें दांव पर—फिलिस्तीनी दूतावास की खौफनाक रिपोर्ट

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: युद्ध की विभीषिका और लगातार जारी बमबारी की मार झेल रहे गाजा से एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली मानवीय त्रासदी की खबर सामने आई है। फिलिस्तीनी दूतावास ने आज एक आधिकारिक और विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए यह दावा किया है कि गाजा पट्टी का स्वास्थ्य ढांचा (Healthcare System) अब पूरी तरह से चरमरा कर ढह चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धग्रस्त क्षेत्र के अधिकांश अस्पताल और मेडिकल क्लिनिक पूरी तरह बंद हो गए हैं। जो इक्का-दुक्का अस्पताल आंशिक रूप से काम कर भी रहे हैं, वहां दवाओं, जीवन रक्षक उपकरणों और ईंधन की इतनी भारी किल्लत हो गई है कि हजारों निर्दोष मरीजों की जान सीधे तौर पर दांव पर लग गई है।

बिना दवा और बिजली के ‘कब्रगाह’ बनते अस्पताल
दूतावास की इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया है कि गाजा में अब मौतें केवल हवाई हमलों या गोलीबारी से ही नहीं हो रही हैं, बल्कि बुनियादी इलाज के अभाव में भी लोग तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। सख्त घेराबंदी (Blockade) के कारण जीवन रक्षक दवाओं (Life-saving drugs), एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) और सर्जिकल उपकरणों की सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप हो चुकी है।

अस्पतालों में जनरेटर चलाने के लिए ईंधन (Fuel) की आखिरी बूंद भी खत्म होने की कगार पर है। इसके चलते बिजली कट गई है, जिससे गहन चिकित्सा कक्ष (ICU), ऑपरेशन थिएटर और ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। डॉक्टरों के सामने हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि उन्हें बिना बेहोश किए, मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में घायलों की सर्जरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा खतरे में कौन?
इस रिपोर्ट में विशेष रूप से उन अति-संवेदनशील मरीजों की स्थिति का जिक्र किया गया है, जिनका जीवन पूरी तरह से मशीनों और नियमित दवाओं पर निर्भर है:

नवजात शिशु: इनक्यूबेटर (Incubators) की बिजली कटने से समय से पहले जन्मे (Premature) सैकड़ों नवजात बच्चों की सांसें उखड़ने लगी हैं।

डायलिसिस और कैंसर के मरीज: किडनी डायलिसिस मशीनों के बंद होने और कीमोथेरेपी की सुविधा न मिलने से इन गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए हर गुजरता दिन मौत का इंतजार करने जैसा हो गया है।

गंभीर रूप से घायल नागरिक: बमबारी में बुरी तरह घायल हुए लोगों के घाव बिना एंटीबायोटिक्स और उचित सर्जरी के तेजी से सड़ रहे हैं, जिससे संक्रमण (Infection) फैल रहा है और अंगों को काटना (Amputation) ही डॉक्टरों के पास आखिरी विकल्प बच गया है।

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन
संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर और जिनेवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) में यह स्पष्ट रूप से अंकित है कि युद्ध के दौरान भी मेडिकल सुविधाओं, एम्बुलेंस और अस्पतालों को निशाना नहीं बनाया जा सकता और उनकी निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके बावजूद गाजा में जमीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। राहत सामग्री के ट्रकों को बॉर्डर पर लंबे समय तक रोका जाना और ‘ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर’ (मानवीय गलियारे) का सुरक्षित न होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि बुनियादी मानवीय सहायता लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे यह त्रासदी और भी भयावह होती जा रही है।

अब आगे क्या?
फिलिस्तीनी दूतावास की यह रिपोर्ट दुनिया के लिए एक बड़ा ‘रेड अलर्ट’ है। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों (जैसे Red Cross और WHO) और शक्तिशाली देशों ने तुरंत हस्तक्षेप करके मेडिकल सप्लाई की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित नहीं की, तो गाजा में मरने वालों का आंकड़ा उस हद तक पहुंच जाएगा जिसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा करता है। यह वक्त अब केवल कूटनीतिक बयानों का नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर इंसानी जानें बचाने के लिए तत्काल और ठोस एक्शन का है।

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