Trending

ओस्लो के नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में गूंजी भारत की आवाज़

पीएम मोदी ने पेश किया 'विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला' का ऐतिहासिक खाका

वैश्विक भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित ‘तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ (India-Nordic Summit) में एक अत्यंत शक्तिशाली और दूरदर्शी संबोधन दिया। मंगलवार दोपहर को विश्व के शीर्ष नेताओं को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने पोस्ट-कोविड दुनिया और युद्धग्रस्त अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में ‘वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला’ (Global Supply Chains) को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारत की ‘विश्वसनीय वैश्विक नीति’ (Reliable Global Policy) का एक व्यापक खाका पेश किया। यह संबोधन इस बात का उद्घोष है कि भारत अब केवल दुनिया का एक बड़ा बाज़ार नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और आर्थिक लचीलेपन (Economic Resilience) का सबसे बड़ा सूत्रधार बन चुका है।

आपूर्ति श्रृंखला का संकट और भारत का समाधान:
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने महामारी (COVID-19), क्षेत्रीय युद्धों (रूस-यूक्रेन, पश्चिम एशिया) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह टूटते हुए देखा है। दुनिया ने यह कड़वा सबक सीखा है कि उत्पादन और आपूर्ति के लिए किसी एक देश (इशारा स्पष्ट रूप से चीन की एकाधिकारवादी नीतियों की ओर था) पर अत्यधिक निर्भरता पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कितनी घातक हो सकती है।

इस संकट के समाधान के रूप में, प्रधानमंत्री ने ‘विश्वसनीय वैश्विक नीति’ का प्रस्ताव रखा। इस नीति का मूल मंत्र है: ‘विविधीकरण, पारदर्शिता और विश्वास’ (Diversification, Transparency, and Trust)। उन्होंने नॉर्डिक देशों (नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड) और संपूर्ण विश्व को आमंत्रित किया कि वे भारत को एक भरोसेमंद विनिर्माण हब (Manufacturing Hub) और आपूर्ति भागीदार के रूप में देखें, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है।

भारत-नॉर्डिक साझेदारी का महत्व:
प्रधानमंत्री ने भारत और नॉर्डिक देशों के बीच मौजूद स्वाभाविक तालमेल (Natural Synergy) को भी रेखांकित किया। नॉर्डिक देश नवाचार (Innovation), हरित प्रौद्योगिकी (Green Tech), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सतत विकास (Sustainable Development) में दुनिया के अग्रणी राष्ट्र हैं। दूसरी ओर, भारत के पास एक विशाल युवा प्रतिभा बल (Skilled Workforce), बड़ा बाज़ार और जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) है।
पीएम मोदी ने प्रस्ताव दिया कि नॉर्डिक देशों की तकनीक और भारत के ‘स्केल’ (Scale – विशाल क्षमता) का मिलन पूरी दुनिया को सस्ती, स्वच्छ और निर्बाध उत्पाद आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।

हरित अर्थव्यवस्था और डिजिटल कूटनीति:
संबोधन का एक बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने ‘मिशन लाइफ’ (LiFE – Lifestyle for Environment) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नॉर्डिक देशों की कंपनियों को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन) में बड़े पैमाने पर निवेश करने का न्योता दिया।

ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत के बढ़ते कद का एक स्पष्ट प्रमाण है। भारत ने दुनिया को यह अहसास करा दिया है कि बिना भारत की सक्रिय भागीदारी के कोई भी सुरक्षित और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला आकार नहीं ले सकती। ‘विश्वसनीय वैश्विक नीति’ का यह खाका आने वाले दशकों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों को फिर से लिखेगा और भारत को वैश्विक पटल पर एक अपरिहार्य आर्थिक महाशक्ति (Indispensable Economic Power) के रूप में स्थापित करेगा।

Related Articles

Back to top button