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विश्वनाथ का स्वर्णिम पंच, महिला टीम चार स्वर्ण के साथ बनीं चैंपियन

एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन

भारत ने शुक्रवार को यहां एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपने यादगार अभियान का समापन पुरुषों के 50 किलोग्राम वर्ग में विश्वनाथ सुरेश के स्वर्ण पदक के साथ किया। विश्वनाथ ने फाइनल में शानदार दबदबा दिखाते हुए जापान के दाइची इवाई को 5-0 से हराया।

सचिन ने कड़े मुकाबले में रजत पदक जीतकर पदकों की संख्या बढ़ाई, जिससे पुरुष टीम का प्रदर्शन भी बेहद प्रभावशाली रहा। भारत पदक तालिका में पांच स्वर्ण पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। कजाकिस्तान ने भारत से एक स्वर्ण अधिक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया, हालांकि कुल 16 पदकों के साथ भारत सबसे आगे रहा।

इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत भारतीय महिला टीम का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा, जिसने 10 पदक जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। इन 10 पदकों में चार स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य शामिल थे, जो महाद्वीपीय स्तर पर उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विश्वनाथ ने इस स्वर्ण के साथ मुक्केबाजी जगत में अपनी तेजी से बढ़ती पहचान को और मजबूत किया। अब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को स्थापित कर लिया है।

उलानबटोर में उनका अभियान खास तौर पर प्रभावशाली रहा, जहां फाइनल तक पहुंचने के दौरान उन्होंने दुनिया के नंबर एक मुक्केबाज को हराकर बड़ा उलटफेर किया। टीम के प्रदर्शन पर भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “भारतीय मुक्केबाजी और विशेष रूप से हमारी महिला मुक्केबाजों के लिए यह एक असाधारण अभियान रहा है। हमारी महिलाओं ने चार स्वर्ण पदक जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

पुरुष टीम का प्रदर्शन भी प्रभावशाली रहा, खासकर युवा विश्वनाथ का, जिन्होंने स्वर्ण जीता। उनका प्रदर्शन हमारी भविष्य की तैयारी की मजबूती को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। पिछली विश्व चैंपियनशिप के बाद टीम में कई बदलावों के बावजूद इस टीम ने शानदार जुझारूपन और क्षमता दिखाई है और महाद्वीप के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों को हराकर खिताब जीते हैं।” सिंह ने यह भी कहा, “हम उभरती प्रतिभाओं की एक नई लहर देख रहे हैं, जिनमें कई खिलाड़ी बड़े मंच पर पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।”

महिला टीम के लिए मीनाक्षी हुड्डा, प्रीति पंवार, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि जैस्मीन लंबोरिया और अल्फिया पठान ने रजत पदक हासिल किए। इसके अलावा चार अन्य मुक्केबाजों ने कांस्य पदक भी अपने नाम किए।

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