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नदी कायाकल्प और प्रदूषण नियंत्रण पर राज्यों की प्रगति की हुई समीक्षा

प्रदूषणमुक्त नदी तंत्र किसी देश के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि देश में नदियों के कायाकल्प और प्रदूषण नियंत्रण पर राज्यों की प्रगति की समीक्षा समय समय पर की जाए और जैसी स्थिति पाई जाए उसके हिसाब से काम किया जाए। इसी कड़ी में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी. एल. कांता राव की अध्यक्षता में नदी कायाकल्प पर केंद्रीय निगरानी समिति (सीएमसी) की 21वीं बैठक (भाग-II) आयोजित की गई। इस बैठक में संयुक्त सचिव ज़ैगम अली खान और एनएमसीजी के कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) अनूप कुमार श्रीवास्तव के साथ-साथ मंत्रालय, सीपीसीबी, एनआरसीडी और एनएमसीजी के वरिष्ठ अधिकारियों तथा संबंधित राज्य सरकारों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया कि नदी के पानी की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए उत्पन्न सीवेज और शोधन के बीच की खाई को पाटना, मौजूदा एसटीपी का अधिकतम उपयोग और अनुपालन सुनिश्चित करना तथा मौजूदा परियोजनाओं में तेजी लाना महत्वपूर्ण है। सचिव ने राज्यों को सलाह दी कि वे शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को बढ़ाएं; अगर अभी तक ऐसा नहीं किया गया है, तो संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ‘शोधित जल के पुनः उपयोग की नीति’ को अपनाएं; बाढ़ के मैदानों की ज़ोनिंग को मज़बूत करें; निगरानी के तरीकों में सुधार करें; और मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) को समय पर प्रस्तुत करना करना सुनिश्चित करें।

समिति ने तमिलनाडु, कर्नाटक, सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, महाराष्ट्र, गोवा और हिमाचल प्रदेश में हुई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। समिति ने प्रदूषित नदी खंडों के लिए कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें एसटीपी/सीईटीपी की प्रगति, मौजूदा सीवेज शोधन बुनियादी ढांचे के कामकाज और अनुपालन की स्थिति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उपाय, तथा पर्यावरणीय प्रवाह और बाढ़ के मैदानों के विनियमन से संबंधित मुद्दे शामिल थे। तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण के प्रबंधन के लिए कार्य योजनाओं को प्रस्तुत करने की स्थिति, साथ ही नदी कायाकल्प समितियों (आरआरसी) के कामकाज की भी समीक्षा की गई।

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