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हॉर्मुज का चक्रव्यूह चीरकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा भारतीय जहाज शिवालिक, अब दूर होगा रसोई गैस का संकट

मुंद्रा : पश्चिम एशिया के युद्ध के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत की खबर आई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी भारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच, भारतीय ध्वज वाला विशालकाय टैंकर ‘शिवालिक’ 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच गया है। इस जहाज के आने से देश के कई हिस्सों में गहरा रहे रसोई गैस संकट के बादल अब छंटने की उम्मीद जगी है।

 

कूटनीति की जीत: युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकला ‘शिवालिक’

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी सीधे युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से रणक्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में भारतीय जहाजों का वहां से निकलना लगभग नामुमकिन माना जा रहा था। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और ईरानी अधिकारियों के बीच हुए सफल कूटनीतिक संवाद के बाद ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ नामक दो जहाजों को सुरक्षित निकलने का रास्ता (Safe Passage) दिया गया। सोमवार शाम करीब 5 बजे ‘शिवालिक’ ने भारतीय तट पर दस्तक दी।

 

मुंद्रा पोर्ट पर ‘वार फुटिंग’ पर तैयारी, जल्द पहुंचेगा दूसरा जहाज

जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ‘शिवालिक’ के आगमन को देखते हुए मुंद्रा बंदरगाह पर ‘प्रायोरिटी बर्थिंग’ (Priority Berthing) के इंतजाम पहले ही कर लिए गए थे। जहाज के लंगर डालते ही दस्तावेजीकरण और गैस निर्वहन (Unloading) का काम शुरू कर दिया गया है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में एक मिनट की भी देरी न हो। उन्होंने यह भी बताया कि दूसरा जहाज ‘नंदा’ भी जल्द ही भारतीय तट पर पहुंचने वाला है, जिसके बाद गैस की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

 

फारस की खाड़ी में 611 भारतीय नाविक सुरक्षित

मंत्रालय ने देश को आश्वस्त करते हुए बताया कि फारस की खाड़ी में फंसे सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, “पिछले 24 घंटों में वहां कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। वर्तमान में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं, हॉर्मुज के पश्चिम में मौजूद हैं और हम हर एक क्रू मेंबर के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं।”

 

LPG संकट से जूझ रहे आम आदमी को मिलेगी राहत

पिछले कुछ दिनों से हॉर्मुज जलमार्ग बंद होने के कारण देश में एलपीजी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे कई राज्यों में सिलेंडरों की किल्लत और कीमतों में उछाल की खबरें आ रही थीं। 45,000 मीट्रिक टन गैस की यह खेप सीधे बॉटलिंग प्लांटों तक भेजी जाएगी, जिससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

 

सरकार की इस सक्रियता और कूटनीतिक सफलता ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध की वैश्विक स्थितियों के बीच भी भारत अपने ‘ऊर्जा हितों’ की रक्षा करने में सक्षम है।

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