ग्रीनपार्क की पिचों को नई पहचान देने वाले शिवकुमार यादव का निधन
ग्रीनपार्क स्टेडियम की पहचान बदलने वाले, भारतीय क्रिकेट पिच निर्माण के मूक शिल्पकार और बीसीसीआई के सेंट्रल ज़ोन कंसल्टेंट शिवकुमार यादव अब हमारे बीच नहीं रहे।
मंगलवार की शाम करीब साढ़े तीन से चार बजे के बीच ग्रीनपार्क स्टेडियम में पिच के कार्य की निगरानी करते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा। कुर्सी पर बैठे-बैठे वे अचानक बेहोश हो गए।
उन्हें तत्काल सिविल लाइंस स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दिल का दौरा पड़ने की पुष्टि करते हुए कॉर्डियोलॉजी ले जाने की सलाह दी, लेकिन दुर्भाग्यवश कॉर्डियोलॉजी गेट पर पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनकी पत्नी और बेटा इस समय पुणे में हैं, जिन्हें इस दुखद समाचार की सूचना दे दी गई है। उनके बुधवार सुबह तक कानपुर पहुंचने की संभावना है।

शिवकुमार यादव का अंतिम संस्कार बुधवार को उनके गृह जनपद बरेली में किया जाएगा। फिलहाल उनका पार्थिव शरीर ग्रीनपार्क स्टेडियम में रखा गया है, जहां उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए खिलाड़ियों, अधिकारियों और क्रिकेट प्रेमियों का तांता लगा हुआ है। लगभग ढाई से तीन दशक तक ग्रीनपार्क स्टेडियम से जुड़े रहे शिवकुमार यादव ने इस मैदान की तक़दीर ही बदल दी।
जब उनका गाजीपुर से कानपुर तबादला हुआ था, तब ग्रीनपार्क की पहचान ऐसे टेस्ट सेंटर के रूप में थी जहां नतीजे नहीं निकलते थे। ‘ड्रॉ मैचों का बादशाह’ कहलाने वाले इस मैदान पर उस दौर में ग्राउंड्समैन सीताराम और छोटेलाल ही विकेट का निर्माण किया करते थे।
खेल विभाग में इलेक्ट्रिशियन के पद पर नियुक्त शिवकुमार यादव ने पिच निर्माण की बारीकियां सीखीं और अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर देश के सबसे अनुभवी क्यूरेटरों में शुमार हो गए।
उन्होंने ग्रीनपार्क के तथाकथित ‘मुर्दा विकेट’ में जान डाल दी और उसे एक स्पोर्टिंग विकेट में बदल दिया। उनके काम का असर यह हुआ कि ग्रीनपार्क दोबारा नतीजे देने लगा और उस पर लगे कलंक मिट गए।
शिवकुमार यादव के विकेट निर्माण की कला के मुरीद देश के दिग्गज क्रिकेटर भी रहे। मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों ने उनके द्वारा तैयार पिचों की खुलकर सराहना की और कई बार निजी तौर पर उन्हें पुरस्कृत भी किया।
इसके बाद तो उन्हें देश के उन क्रिकेट सेंटरों में भी मदद के लिए भेजा जाने लगा, जहां विकेट को लेकर समस्याएं आती थीं। बेहद मिलनसार स्वभाव के शिवकुमार यादव टर्फ विकेट निर्माण के लिए कड़ी मेहनत करते थे। उनका जुनून इस कदर था कि ऑफ-सीजन में भी देर रात तक उन्हें ग्रीनपार्क में विकेट पर काम करते देखा जाता था।
टेस्ट, वन-डे और टी-20—हर फॉर्मेट के लिए जैसा विकेट मांगा जाता, वे वैसा ही विकेट तैयार कर देते थे। लाल और काली मिट्टी के विकेट बनाने में देश में उनका कोई सानी नहीं था। हाल के दिनों में वे आईपीएल के लिए भी विकेट तैयार कराने में जुटे हुए थे।
शिवकुमार यादव के निधन पर क्रिकेट इंडोनेशिया ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रेस रिलीज जारी करते हुए क्रिकेट इंडोनेशिया ने कहा कि शिवकुमार यादव का योगदान इंडोनेशिया में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
बीसीसीआई के नेटवर्क से जुड़े एक सम्मानित क्रिकेट टर्फ विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से समय निकालकर इंडोनेशिया की यात्रा की और बाली इंटरनेशनल ओवल में टर्फ सुविधाओं की तैयारी में अहम भूमिका निभाई।
क्रिकेट इंडोनेशिया ने कहा कि अपने व्यावहारिक मार्गदर्शन, विशेषज्ञता और ज्ञान साझा करने की इच्छा के माध्यम से शिवकुमार यादव ने इंडोनेशियाई क्रिकेट को मजबूत किया।
उनकी प्रतिबद्धता केवल पेशेवर दायित्व तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह खेल के वैश्विक विकास के प्रति उनके व्यक्तिगत जुनून को दर्शाती थी। बाली में उनके कार्य और उपस्थिति की स्मृतियां इंडोनेशिया में क्रिकेट विकास की यात्रा में स्थायी रूप से दर्ज रहेंगी।
पूरे इंडोनेशियाई क्रिकेट समुदाय की ओर से क्रिकेट इंडोनेशिया ने इस दुख की घड़ी में शिवकुमार यादव के परिवार, मित्रों और सहयोगियों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। ग्रीनपार्क से लेकर बाली तक, क्रिकेट की हर पिच पर उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।



