209 वनडे, फिर भी अधूरी कहानी: जडेजा का वनडे सफर अब अंतिम मोड़ पर!
15 जनवरी 2013—एक ऐसी तारीख, जो क्रिकेट के कैलेंडर में नहीं, बल्कि आंकड़ों के हाशिये पर दर्ज है। न उस दिन कोई वर्ल्ड रिकॉर्ड बना, न कोई ट्रॉफी जीती गई, न ही किसी कप्तान ने इतिहास बदला।
फिर भी यह तारीख आज इसलिए चर्चा में है, क्योंकि यहीं से एक लंबा अंतराल शुरू होता है—भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद हरफनमौला रवींद्र जडेजा के बल्ले के लिए।
उस दिन जडेजा ने भारत में वनडे क्रिकेट में अपना आखिरी अर्धशतक लगाया था। तब विराट कोहली अभी आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर-1 नहीं थे, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बने थे, और भारतीय क्रिकेट अपने मौजूदा दौर की ओर बढ़ ही रहा था।
यानी जब खेल और राजनीति—दोनों अपने बड़े मोड़ों से पहले के पड़ाव पर थे, तब जडेजा का बल्ला भी आखिरी बार भारत में 50 के पार गया। आज, सालों बाद, वही तारीख अचानक इसलिए प्रासंगिक हो गई है क्योंकि रवींद्र जडेजा की वनडे टीम में भूमिका और भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक यही सवाल विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर उठ रहे थे। दोनों दिग्गजों पर डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने का दबाव बनाया गया, यह तक कहा गया कि अगली सीरीज उनका 2027 वर्ल्ड कप का टिकट तय करेगी।
लेकिन रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर और विराट कोहली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में धमाकेदार प्रदर्शन कर आलोचनाओं को खामोश कर दिया। 2025 के अंत तक दोनों ने विजय हजारे ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया। नतीजा साफ है—रोहित और विराट के भविष्य पर फिलहाल कोई सवाल नहीं बचा।
यहीं से कहानी का फोकस शिफ्ट होता है और कैमरा टिकता है रवींद्र जडेजा पर। अगर पिछले 10 वनडे मुकाबलों को देखें तो जडेजा को 7 बार बल्लेबाज़ी का मौका मिला। इनमें वह सिर्फ एक बार ही 30 से ज्यादा रन बना सके।
कुल मिलाकर इन 10 मैचों में उनके बल्ले से सिर्फ 114 रन निकले, जिसमें वह तीन बार नॉट आउट भी रहे। इन मुकाबलों में चैंपियंस ट्रॉफी के सभी मैच शामिल हैं—और हां, उसी टूर्नामेंट में जडेजा ने विनिंग शॉट लगाकर भारत को जीत भी दिलाई थी।
जडेजा का रोल हमेशा सिर्फ रन या विकेट से नहीं आंका गया। वह टीम में एक क्लासिक हरफनमौला की भूमिका निभाते हैं। यह भी सच है कि मजबूत टॉप ऑर्डर के चलते उन्हें बल्लेबाज़ी के ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन अगर गेंदबाज़ी की बात करें तो वहां भी आंकड़े ज्यादा राहत नहीं देते। पिछले 10 वनडे मैचों में जडेजा सिर्फ 6 विकेट ले पाए हैं, जबकि 5 बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
उम्र भी अब एक फैक्टर बन चुकी है। जडेजा फिलहाल 37 साल के हैं और 2027 वर्ल्ड कप आते-आते वह लगभग 39 के हो जाएंगे।
मौजूदा वनडे प्रदर्शन को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट को उनके विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इस बहस में सबसे पहला नाम आता है अक्षर पटेल का, जिन्हें जडेजा का लाइक-टू-लाइक रिप्लेसमेंट माना जा सकता है।
सही मौके और निरंतरता के साथ वह आने वाले समय में टीम के लिए एक मजबूत हरफनमौला साबित हो सकते हैं। इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर, रियान पराग और आयुष बदोनी जैसी उभरती प्रतिभाएं भी इस दौड़ में मौजूद हैं।
रवींद्र जडेजा (वनडे करियर के आंकड़े)
जडेजा ने भारत में आखिरी वनडे अर्धशतक जनवरी 2013 में लगाया था।
जडेजा 209 वनडे खेल चुके हैं, मगर अब तक उनके इस फॉर्मेट में 3000 रन पूरे नहीं हुए हैं।
जडेजा ने वनडे में सिर्फ 2 बार 5 विकेट हॉल लिया है। एक 2023 में और एक 2013 में।
जडेजा ने अपने वनडे करियर में कभी शतक नहीं लगाया, उनका हाईएस्ट स्कोर 87 रन का है जो 2014 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ बनाया था।
जडेजा ने 209 वनडे में सिर्फ 13 अर्धशतक बनाए हैं।



