आवास बुकिंग विवाद व लॉजिस्टिक गड़बड़ी ने बढ़ाई राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप की मुश्किलें
राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शुक्रवार को कई राज्य टीमों के खिलाड़ियों, कोचों और अधिकारियों को उनके आवंटित आवास खाली करने का निर्देश दिया गया, जिससे आयोजन में नई लॉजिस्टिक समस्याएं सामने आईं।
यह समस्या लगातार दूसरे दिन देखने को मिली, जब कई अधिकारियों ने दावा किया कि उनके कमरे पहले से बुक नहीं किए गए थे। टीम के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर एक समाचार एजेंसी को बताया, “जब हम प्रतियोगिता स्थल से लौटे, तो हमें कमरे खाली करने के लिए कहा गया।
कहा गया कि हमारी बुकिंग हुई ही नहीं थी।” एक अन्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि दिन के मुकाबलों के बाद उनका सामान पहले ही पैक कर रिसेप्शन में रख दिया गया था।
छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मणिपुर और तमिलनाडु जैसी कई राज्य टीमें इस समस्या की जानकारी दे रही हैं। बेहद ठंडे मौसम में—दस डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान में—बाहर खड़े खिलाड़ियों और कोचों की तस्वीरें सोशल मीडिया और मुक्केबाजी समुदाय में तेजी से वायरल हुईं।

एक कोच ने बताया, “हमें जो कमरे दिए गए थे उनमें ताले तक नहीं थे। जब हम मुकाबलों के बाद लौटे, तो हमारे बैग पहले ही पैक कर रिसेप्शन में रख दिए गए थे।”
अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय महासंघ द्वारा जारी ‘टूर्नामेंट प्रोस्पेक्टस’ स्पष्ट रूप से कहता है कि आयोजन के दौरान सभी मुक्केबाजों और अधिकारियों को मुफ्त आवास प्रदान किया जाएगा। इसके बावजूद शुक्रवार रात को आयोजकों से संपर्क करने के कई प्रयास व्यर्थ रहे।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने कहा कि स्थिति की जानकारी मिलते ही तत्काल कदम उठाए गए। बीएफआई ने बताया, “प्रभावित खिलाड़ियों को ‘जीबी यूनिवर्सिटी’ के सबसे नजदीकी स्थान पर तत्काल आवास प्रदान किया गया, जहां रात के लिए उपयुक्त सोने की व्यवस्था की गई है।
महासंघ इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।” यह आवास विवाद राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पिछले सप्ताह से चल रही कई समस्याओं में जुड़ गया है।
इस आयोजन में पहले ही रेफरी और मुकाबलों के फैसलों को लेकर विवाद, बाधित मुकाबले और कार्यक्रम में अराजकता जैसी समस्याएं देखने को मिल चुकी हैं, जिससे खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है।



