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Amit Shah In Rajya Sabha: जानिए देश में नक्सलवाद का कब होगा खात्मा, अमित शाह ने किया ये बड़ा ऐलान

बीएस राय : गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर विस्तार से चर्चा की. अपने संबोधन में उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद, आतंकवाद और गृह मंत्रालय में किए गए बदलावों पर विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने दावा किया कि पिछले दस सालों में देश ने ऐसी तरक्की देखी है, जो आजादी के बाद से नहीं हुई थी. नक्सलवाद पर कड़ा रुख गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का वादा किया.

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद कोई राजनीतिक समस्या नहीं है, लेकिन इसे खत्म करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि मोदी सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है, ताकि स्थानीय लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक: 2025 में अब तक 90 नक्सली मारे गए, 104 गिरफ्तार हुए और 164 ने आत्मसमर्पण किया. 2024 में 290 नक्सली मारे गए, 1090 गिरफ्तार हुए और 881 ने आत्मसमर्पण किया।

2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की 16,463 घटनाएं हुईं, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल (2014-2024) में यह संख्या 53% घटकर 7,744 हो गई। सुरक्षा बलों की शहादत की संख्या 73% घटकर 509 हो गई और नागरिकों की मौतों में 70% की कमी आई।

गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर चलती है। पहले आतंकी हमलों के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती थी, लेकिन उरी और पुलवामा हमलों के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान को जवाब दिया।
कश्मीर में आए बदलावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि: 2019 से 2024 के बीच 40,000 सरकारी नौकरियां दी गईं। 1.51 लाख स्वरोजगार के अवसर पैदा किए गए।

आतंकवाद से जुड़ी हिंसक घटनाओं में 70% की कमी आई। जम्मू-कश्मीर में 2004 से 2014 के बीच 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह संख्या घटकर 2,242 रह गई। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता के लिए लिया गया है। यह फैसला संविधान निर्माताओं की “एक संविधान, एक झंडा” की सोच को पूरा करता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने गृह मंत्रालय की जिम्मेदारियों और कामकाज में हुए बदलावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा गृह मंत्रालय के दायरे में आती है, जबकि कानून व्यवस्था राज्यों के अधीन है। हालाँकि, आधुनिक अपराध अब राज्य-सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं।

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