हिमंत बिस्वा सरमा के बयान का सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
नई दिल्ली : ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हाल में दिए गए मुस्लिम विरोधी बयानों की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने का…

नई दिल्ली : ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हाल में दिए गए मुस्लिम विरोधी बयानों की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के राजनीतिक विमर्श में मुसलमानों के खिलाफ घृणास्पद भाषण और खुला उकसावा तेजी से सामान्य होता जा रहा है। जो बात कभी हाशिये पर पड़ी आवाजों तक सीमित थी, अब सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा भी दोहराई जा रही है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अब असम के मुख्यमंत्रियों ने मुसलमानों को निशाना बनाते हुए बार-बार भड़काऊ और असंवैधानिक टिप्पणियां की हैं।
बोर्ड प्रवक्ता ने कहा कि
असम के मुख्यमंत्री ने तिनसुकिया में एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए कथित तौर पर “मियां” समुदाय को परेशान करने का आह्वान किया ताकि उन्हें असम छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह भी कहा था कि इस समुदाय को कठिनाई पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी थी। इसके अलावा उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों को मतदाता सूची से 4-5 लाख मुसलमानों को हटाने के लिए फॉर्म नंबर 7 दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित किया और उनके आर्थिक बहिष्कार का आह्वान किया।
डॉ. इलियास ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है और अस्वीकार्य है कि एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, खुले तौर पर एक विशेष समुदाय के भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने की वकालत करता हुआ दिखाई देता है। इस तरह के बयान संवैधानिक शासन, कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत की नींव पर प्रहार करते हैं। यदि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक अधिकारी इस तरह के गैरकानूनी दबाव का विरोध करने में विफल रहते हैं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की विश्वसनीयता ही खतरे में पड़ जाएगी।
बोर्ड ने राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू से भी इस असंवैधानिक टिप्पणियों के लिए असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ उचित संवैधानिक कार्रवाई करने की अपील की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश से बिना देरी किए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
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