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समंदर में दादागीरी बंद: होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए क्वाड देश एक साथ, जानें युद्ध के बीच क्या हुआ बड़ा फैसला

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया (Mid East) में जारी भीषण जंग और गहराते वैश्विक तेल संकट के बीच भारत और अमेरिका समेत क्वाड (Quad) गठबंधन ने बहुत बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बंधक बनने से रोकने के लिए चारों मित्र…

Ragwendra P Singh
May 26, 2026
3 min read
समंदर में दादागीरी बंद: होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए क्वाड देश एक साथ, जानें युद्ध के बीच क्या हुआ बड़ा फैसला

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया (Mid East) में जारी भीषण जंग और गहराते वैश्विक तेल संकट के बीच भारत और अमेरिका समेत क्वाड (Quad) गठबंधन ने बहुत बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बंधक बनने से रोकने के लिए चारों मित्र देशों ने दो टूक चेतावनी दी है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) समेत किसी भी समुद्री रास्ते पर व्यापारिक जहाजों की मनमानी नाकेबंदी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी और रिकॉर्डतोड़ महंगाई से बचाने के लिए क्वाड देशों ने इस रणनीतिक जलमार्ग को हर हाल में खुला रखने और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने का एक साझा संकल्प लिया है।

 

ईरान के एक्शन से 3 महीने से बंद है दुनिया की ‘लाइफलाइन’

दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत इस साल 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में बारूद सुलग उठा। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने उसी दिन यानी 28 फरवरी 2026 से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। पिछले करीब तीन महीनों से यह रास्ता बंद होने के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और एलपीजी (गैस) की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जहाजों का किराया आसमान छू रहा है और बीमा कंपनियों ने प्रीमियम बढ़ा दिया है।

 

जहाजों की सुरक्षा के लिए बनेगा ‘क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’

इस गंभीर संकट से निपटने के लिए क्वाड देशों (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की कसम खाई है। इसके लिए जल्द ही एक हाई-लेवल ‘क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ (Quad Fuel Security Forum) का गठन किया जाएगा। यह फोरम न सिर्फ तकनीकी और नीतिगत विश्लेषण करेगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए चारों देशों की नौसेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास (Joint Naval Drill) भी करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के सामरिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) को मजबूत करना है ताकि संकट के समय तेल की कमी न हो।

 

छोटे और कमजोर देशों को बचाने के लिए क्वाड का महाप्लान

इस अहम बैठक में केवल बड़े देशों की नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए चारों देशों ने अपनी अलग-अलग क्षेत्रीय पहलों को तेज करने की सराहना की है:

 

भारत का प्रयास: दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसी देशों को संकट के इस दौर में निरंतर ऊर्जा और ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना।

जापान की पहल: एशिया की संपूर्ण ऊर्जा स्थिरता के लिए ‘पावर एशिया’ कार्यक्रम को और अधिक मजबूत बनाना।

ऑस्ट्रेलिया का योगदान: दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की मदद के लिए 2 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश कोष तैयार करना, आसियान पावर ग्रिड को सपोर्ट देना और फिजी को 3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वित्तीय मदद देना।

अगर किसी ने रोका रास्ता, तो चारों देश मिलकर देंगे मुंहतोड़ जवाब

क्वाड के इस साझा बयान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अब और ज्यादा समय तक बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। क्वाड देशों ने कड़े लहजे में कहा है कि यदि अब किसी भी देश या आतंकी संगठन ने इन व्यापारिक जहाजों को रोकने या उन पर हमला करने की हिमाकत की, तो चारों देश मिलकर सैन्य और रणनीतिक स्तर पर उसका कड़ा विरोध करेंगे। इस फैसले के बाद अब हिंद-प्रशांत से लेकर मिडिल ईस्ट तक की समुद्री राजनीति गरमा गई है।

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