विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के किसानों को बड़ा तोहफा, सरकार ने तैयार किया 3.03 लाख करोड़ रुपये का महा प्लान
उत्तर प्रदेश में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए बैंक ऋण के लक्ष्य में भारी बढ़ोतरी की गई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऋण का यह दायरा बढ़ाकर 3.03 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे किसानों, पशुपालकों और कृषि…

उत्तर प्रदेश में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए बैंक ऋण के लक्ष्य में भारी बढ़ोतरी की गई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऋण का यह दायरा बढ़ाकर 3.03 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे किसानों, पशुपालकों और कृषि उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी।
राघवेन्द्र प्रताप सिंह
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किसानों, पशुपालकों, मत्स्य पालकों और कृषि उद्यमियों के लिए वित्तीय मदद का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान प्रदेश के बैंक कृषि और उससे जुड़े संबद्ध क्षेत्रों में अब कुल 3.03 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऋण वितरित करेंगे। केंद्र सरकार ने पहले से निर्धारित 2.78 लाख करोड़ रुपये के ऋण लक्ष्य में पूरे 25 हजार करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। केंद्र सरकार के इस निर्देश के बाद प्रदेश में कार्यरत सभी प्रमुख बैंकों को संशोधित और बढ़ा हुआ लक्ष्य सौंप दिया गया है।
चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत में वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि उद्यम और उद्यान सहित अन्य संबद्ध क्षेत्रों के लिए उत्तर प्रदेश में 2.78 लाख करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि, वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीने बीतने के बाद इस अक्टूबर माह में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने किसानों की बढ़ती जरूरतों और कृषि क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए इस लक्ष्य को संशोधित कर 3.03 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। चूंकि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सरकार के इस कदम को कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस बढ़े हुए लक्ष्य के कारण राज्य सरकार भी अधिक से अधिक किसानों को कृषि और उससे जुड़े कार्यों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंकों पर दबाव बना सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों के लिए इस विशाल लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा, क्योंकि इसके लिए वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों को आपसी तालमेल के साथ ग्रामीण इलाकों में ऋण वितरण की प्रक्रिया को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाना होगा[cite: 28, 29]। राज्य सरकार का यह महा प्लान न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में मदद करेगा, बल्कि केसीसी (Kisan Credit Card) और अन्य कृषि लोन योजनाओं के माध्यम से किसानों को समय पर पूंजी उपलब्ध कराएगा, जिससे खाद, बीज, सिंचाई और आधुनिक उपकरणों की खरीद आसान हो सकेगी।
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