यूपी में कैब बुक करने वालों के लिए बड़ी खबर: लेट पिकअप पर ड्राइवर पर ₹100 जुर्माना, सवारी को मिलेगा सीधा फायदा
राघवेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में ओला (Ola), उबर (Uber) जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने कैब कंपनियों और ड्राइवरों की…

राघवेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में ओला (Ola), उबर (Uber) जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने कैब कंपनियों और ड्राइवरों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए नई 'उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली' यानी एग्रीगेटर पॉलिसी लागू कर दी है। इसके तहत न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है, बल्कि ड्राइवरों और कंपनियों के लिए भी सख्त नियम तय किए गए हैं।
लेट पिकअप पर लगेगा ₹100 का जुर्माना
अक्सर कैब बुक करने के बाद यात्रियों को ड्राइवर का लंबा इंतजार करना पड़ता है। लेकिन नए नियमों के मुताबिक, यदि कैब बुक करने के बाद ड्राइवर तय समय से 10 मिनट की देरी से पिकअप लोकेशन पर पहुंचता है, तो राइड को रद्द माना जा सकता है। ऐसे मामलों में कैब एग्रीगेटर कंपनी संबंधित ड्राइवर पर 100 रुपये तक का जुर्माना लगाएगी।
सबसे अच्छी बात यह है कि इस जुर्माने की राशि का सीधा फायदा यात्री को मिलेगा। यात्री जब अगली बार कैब बुक करेगा, तो उसे किराए में इस 100 रुपये (जुर्माने के बराबर) की छूट दी जाएगी।
किराए और सर्ज प्राइसिंग (Surge Pricing) पर लगाम
नई नीति के अनुसार, अब कैब कंपनियां मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेंगी। एग्रीगेटर कंपनियां निर्धारित बेस फेयर (Base Fare) से अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही किराया बढ़ा सकती हैं। साथ ही, अब किसी भी यात्री से 'डेड माइलेज' (अर्थात ड्राइवर द्वारा यात्री को पिकअप करने के लिए तय की गई दूरी) का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यात्री को केवल पिकअप पॉइंट (यात्रा के प्रारंभ बिंदु) से ड्रॉप पॉइंट तक का ही किराया देना होगा। कम से कम किराया न्यूनतम 3 किलोमीटर के लिए तय किया गया है।
ड्राइवरों के हित का भी रखा गया ध्यान
इस पॉलिसी में सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि ड्राइवरों के लिए भी अच्छे प्रावधान हैं। नए नियम के तहत, कैब चलाने वाले ड्राइवर को प्रत्येक राइड के कुल किराए का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। एग्रीगेटर कंपनी (जैसे ओला-उबर) अब कमीशन के तौर पर अधिकतम 20 प्रतिशत हिस्सा ही अपने पास रख सकेगी।
लाइसेंस और निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च
परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने एग्रीगेटर पॉलिसी को सख्ती से लागू करने के लिए 'upmyfleet.com' पोर्टल लॉन्च किया है। अब प्रदेश में काम कर रही सभी कैब और कूरियर एग्रीगेटर कंपनियों को इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए 25,000 रुपये आवेदन शुल्क और 5 लाख रुपये लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है। इसके अलावा, फ्लीट की गाड़ियों की संख्या के आधार पर कंपनियों को सिक्योरिटी मनी भी जमा करनी होगी। कंपनियों को एक 24x7 कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा, जिससे सभी पंजीकृत वाहनों और ड्राइवरों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। प्रदूषण कम करने के लिए एनसीआर (NCR) क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई एग्रीगेटर पॉलिसी कैब सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक शानदार कदम है। इससे न केवल यात्रियों को कैब चालकों की लेटलतीफी और मनमाने किराए से मुक्ति मिलेगी, बल्कि ड्राइवरों को भी उनकी मेहनत का उचित भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।
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