द इंडियन व्यू

यूपी में 24 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर अगले आदेश तक रोक, 62 जिलों के 158 केंद्रों की जांच में मिलीं अनियमितताएं

Poonam Kumari
November 4, 2026
7 min read
यूपी में 24 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर अगले आदेश तक रोक, 62 जिलों के 158 केंद्रों की जांच में मिलीं अनियमितताएं

यूपी एफएसडीए ने 10 और ब्लड सेंटरों का संचालन तत्काल प्रभाव से कराया बंद

बिना ELISA जांच रक्त जारी करने से लेकर दूषित प्लाज्मा और अप्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती तक मिलीं खामियां

पहले 14 केंद्रों पर हो चुकी है कार्रवाई, शेष निरीक्षित केंद्रों को कारण बताओ नोटिस

सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अभियान जारी

लखनऊ । मरीजों को सुरक्षित रक्त और ब्लड कंपोनेंट्स उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने चैरिटेबल ब्लड सेंटरों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के दौरान रक्त केंद्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। औचक निरीक्षण में तमाम खामियां मिलने पर 10 और चैरिटेबल ब्लड सेंटरों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अब तक कार्रवाई की जद में आए केंद्रों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। अभियान के तहत 62 जनपदों के 158 ब्लड सेंटरों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच में कहीं बिना अनिवार्य संक्रमण जांच के रक्त जारी करने का मामला सामने आया तो कहीं दूषित फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी), खराब कोल्ड चेन और तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी के चलते यह एक्शन लिया गया।

रक्त की गुणवत्ता से लेकर कोल्ड चेन तक की पड़ताल

एफएसडीए की अंतरजनपदीय औषधि निरीक्षक टीमें ब्लड सेंटरों में रक्त संग्रह से लेकर मरीजों को रक्त एवं उसके घटकों की आपूर्ति तक पूरी व्यवस्था की पड़ताल कर रही हैं। जांच के दायरे में एचआईवी, एचसीवी और एचबीएसएजी (HBsAg) जैसे संक्रमणों की अनिवार्य जांच के लिए ELISA व्यवस्था, रक्त का सुरक्षित भंडारण, कोल्ड चेन, तापमान नियंत्रण, डोनर एवं इश्यू रजिस्टर, स्टॉक का मिलान, निर्धारित दरों पर रक्त एवं कंपोनेंट्स की उपलब्धता और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की तैनाती शामिल है।

मौसमी बीमारियों, विशेषकर डेंगू और मलेरिया के दौरान मरीजों को रक्त और प्लेटलेट्स की अतिरिक्त जरूरत पड़ती है। ऐसे में रक्त केंद्रों की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही मरीजों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए विभाग ने चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित रक्त केंद्रों की जांच तेज कर दी है।

10 केंद्रों में मिलीं चौंकाने वाली खामियां

ताजा कार्रवाई में अलग-अलग जिलों के 10 ब्लड सेंटरों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई केंद्रों पर अनिवार्य जांच के बिना रक्त जारी किया जा रहा था, जबकि कुछ जगहों पर रक्त के घटकों की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण के मानकों का पालन तक नहीं हो रहा था।

सुरजपुर चैरिटेबल ब्लड सेंटर, गौतमबुद्ध नगर: निरीक्षण के दौरान मेडिकल ऑफिसर समेत प्रमुख स्टाफ अनुपस्थित मिला। एफेरेसिस मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं थे। डीप फ्रीजर में दूषित एफएफपी और एक्सपायर्ड दवाइयां मिलीं। तापमान, रक्तदान शिविर और स्टॉक से संबंधित रजिस्टर अधूरे थे। लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद केंद्र संचालित पाया गया। सभी गतिविधियों पर रोक लगाते हुए लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित कर्मियों को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति की गई है।

सरोज चैरिटेबल ब्लड सेंटर, सीतापुर: यहां एफएफपी यूनिट में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के अंश मिले। बिना ELISA जांच वाले ब्लड बैग टेस्टेड फ्रिज में रखे थे और ऐसी दो यूनिट जारी भी कर दी गई थीं। डीप फ्रीजर और रेफ्रिजरेटर के तापमान निगरानी उपकरण एवं अलार्म खराब मिले। स्टेरिलिटी टेस्टिंग और अन्य जरूरी रिकॉर्ड भी मानकों के अनुरूप नहीं थे। केंद्र पर स्टॉप ऑर्डर जारी किया गया।

कान्हा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, प्रयागराज: मेडिकल ऑफिसर समेत तकनीकी स्टाफ अनुपस्थित मिला। स्टेरिलिटी टेस्टिंग नहीं हो रही थी और उपकरणों की कैलिब्रेशन अवधि समाप्त हो चुकी थी। डोनर एवं इश्यू रजिस्टर में जरूरी विवरण और हस्ताक्षर गायब थे। आपातकालीन दवाइयों की कमी, अधूरी लॉगबुक और असंतोषजनक साफ-सफाई भी सामने आई।

गोमती चैरिटेबल ब्लड सेंटर, शाहजहांपुर: यहां संक्रमण जांच के लिए जरूरी किट उपलब्ध नहीं होने के बावजूद बिना ELISA जांच के 167 यूनिट रक्त जारी कर दिया गया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर बंद मिले। तापमान रिकॉर्ड गायब थे और ब्लड बैग का वजन निर्धारित प्रक्रिया के बजाय मनमाने तरीके से तय किया जा रहा था। अप्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती और स्टेरिलाइजेशन व्यवस्था में भी गंभीर कमियां मिलीं।

जीवन सुरक्षा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, सम्भल: स्टेरिलिटी टेस्टिंग नहीं हो रही थी। एफेरेसिस मशीन और उसकी लॉगबुक उपलब्ध नहीं थी, जबकि -80 डिग्री सेल्सियस क्षमता वाला डीप फ्रीजर बंद मिला। आपातकालीन दवाइयों, ऑक्सीजन सिलेंडर और जनरेटर की व्यवस्था भी नहीं थी। मरीजों के संपर्क नंबर दर्ज नहीं होने से रक्त जारी किए जाने की पुष्टि करना संभव नहीं हो सका।

एटा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, कासगंज: मेडिकल ऑफिसर दोनों दिन अनुपस्थित मिले। एचआईवी और एचसीवी जांच, ELISA प्रिंटआउट, स्टेरिलिटी टेस्टिंग और डोनर सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। एफएफपी का वास्तविक स्टॉक 171 यूनिट मिला, जबकि रजिस्टर में 238 यूनिट दर्ज थीं। इस तरह स्टॉक में 67 यूनिट का अंतर पाया गया। कई जरूरी रीजेंट भी उपलब्ध नहीं थे।

श्री जी चैरिटेबल ब्लड सेंटर, अयोध्या: बिना ELISA जांच के 23 यूनिट रक्त घटक जारी किए जाने का मामला सामने आया। अनटेस्टेड रक्त टेस्टेड फ्रिज में रखा था और स्टेरिलिटी टेस्टिंग नहीं हो रही थी। सेंट्रीफ्यूज में जंग, खाली ऑक्सीजन सिलेंडर और एफेरेसिस मशीन का अभाव मिला। इसके अलावा ब्लड कंपोनेंट्स के बिल निर्धारित सरकारी दरों से अधिक पर काटे जाने की अनियमितता भी उजागर हुई। केंद्र में रक्त संग्रह और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई।

ग्रामीण भारत चैरिटेबल ब्लड सेंटर, आगरा: मेडिकल ऑफिसर और तकनीकी स्टाफ अनुपस्थित मिले। डोनर एवं इश्यू रजिस्टर अधूरे थे। स्टेरिलिटी टेस्टिंग नहीं होने के साथ आपातकालीन दवाइयों की कमी और साफ-सफाई में लापरवाही सामने आई।

मां माया देवी चैरिटेबल ब्लड सेंटर, फिरोजाबाद: यहां डीप फ्रीजर में आरबीसी से संदूषित लाल रंग का एफएफपी मिला। एफेरेसिस उपकरण, हीमोग्लोबिनोमीटर, मलेरिया किट और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं थे। लाइसेंस प्राप्त स्टाफ भी अनुपस्थित मिला। अनिवार्य जांच, तापमान निगरानी और रक्त वितरण से जुड़े कई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

जय श्री श्याम चैरिटेबल ब्लड सेंटर, आगरा: बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन मिला। टेस्टिंग एवं रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत सामने आए। एफेरेसिस से संबंधित दस्तावेज भी अधूरे थे, जिससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। केंद्र के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई।

पहले इन 14 केंद्रों पर भी हो चुकी है कार्रवाई

इससे पहले विभाग आगरा के जय हिंद और श्री बालाजी, मुरादाबाद के पाकवारा, अमरोहा के जीवन-24, बिजनौर के यशवंती, बदायूं के भारत ह्यूमैनिटी, बुलंदशहर के डिबाई, जौनपुर के बदलापुर, लखीमपुर खीरी के अनुभव, गोरखपुर के मन्या, अलीगढ़ के न्यू बापू और लखनऊ के KHS, लिटिल स्टार तथा रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर पर भी कार्रवाई कर चुका है।

इन केंद्रों की जांच में ELISA के स्थान पर रैपिड किट से संक्रमण की जांच, -80 डिग्री सेल्सियस क्षमता वाले डीप फ्रीजर में 26.7 डिग्री सेल्सियस तापमान, कंपोनेंट रूम में फफूंद, एक्सपायर्ड दवाइयों का इस्तेमाल और जरूरी स्टाफ की गैरमौजूदगी जैसी गंभीर खामियां मिली थीं।

शेष केंद्रों को नोटिस, सुरक्षित निस्तारण के निर्देश

एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि जिन केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है और जहां अनियमितताएं मिली हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिन ब्लड सेंटरों के संचालन पर रोक लगाई गई है, वहां उपलब्ध रक्त और ब्लड कंपोनेंट्स के मानकों के अनुरूप सुरक्षित निस्तारण के लिए सभी जिलाधिकारियों को एडवाइजरी भी जारी की गई है।विभाग का जोर केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्त संग्रह, जांच, भंडारण और मरीजों तक उसकी आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने पर है। रक्तदान किसी जरूरतमंद को जीवन देने का माध्यम है। ऐसे में रक्त केंद्रों की लापरवाही से मरीजों की जान जोखिम में न पड़े, इसके लिए एफएसडीए ने निगरानी और प्रवर्तन अभियान को और तेज कर दिया है।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

सम्बंधित ख़बरें