बांग्लादेश की साजेक घाटी में फंसे 2,000 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया :

ढाका ( अभिषेक सिंह ) : बांग्लादेश के रंगामाटी जिले की साजेक घाटी में फंसे 2000 से अधिक पर्यटकों को सेना और पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर रास्ता बंद कर दिया था। इसके कारण दिगिनाला और साजेक के बीच यातायात रुक गया। इस दौरान गोलीबारी की खबरें भी सामने आईं। कई घंटों की बातचीत के बाद सुरक्षा बलों ने रास्ता खुलवाया और पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना में सेना के पांच जवान और पुलिस के दो अधिकारियों घायल होने की खबर है। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अगले आदेश तक साजेक घाटी में पर्यटकों के आने पर रोक लगा दी है।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर ईंट-पत्थर फेंके और यूनाइटेड पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (UPDF) के सशस्त्र सदस्यों और सेना के बीच गोलीबारी हुई। इस हिंसा में सेना के 6 जवानों और 2 पुलिसकर्मियों सहित कुल 9 सुरक्षाकर्मी घायल हुए। सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज कर और जवाबी कार्रवाई कर स्थिति पर नियंत्रण पाया। शुक्रवार को सेना और पुलिस के कड़े सुरक्षा पहरे में 101 वाहनों के काफिले के जरिए लगभग 2,933 से 3,000 पर्यटकों को सुरक्षित खगड़ाछड़ी पहुंचाया गया। किसी भी पर्यटक के हताहत होने की खबर नहीं है।
साजेक घाटी (Sajek Valley) बांग्लादेश का एक बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय हिल स्टेशन है। अपनी अदम्य प्राकृतिक सुंदरता, चारों तरफ तैरते बादलों और हरी-भरी पहाड़ियों के कारण इसे "रंगामती की छत" और "पहाड़ियों की रानी" भी कहा जाता है। यह समुद्र तल से लगभग 1,800 से 2,000 फीट की ऊंचाई पर कसालोंग पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित है। इस घाटी का नाम साजेक नदी के नाम पर रखा गया है, जो भारत और बांग्लादेश के बीच एक प्राकृतिक सीमा का काम करती है। कांगलाक पहाड़ी (Konglak Hill) साजेक घाटी का सबसे ऊंचा स्थान है, जहां से घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
यहां चकमा, मारमा, त्रिपुरा और लुशाई जैसी कई स्वदेशी जनजातियां निवास करती हैं। पर्यटक उनके पारंपरिक जीवन और संस्कृति को करीब से देख सकते हैं।
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