पाकिस्तान का इंडोनेशिया समेत तीन देशों से डिफेंस प्रोडक्शन पर समझौता, क्या भारत पर पड़ेगा असर?

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : क़तर की राजधानी दोहा में बीते बुधवार को चार ऐसे देशों के रक्षा प्रतिनिधि एक मेज पर आए, जिनकी सैन्य ताक़त, आर्थिक क्षमता और जिओपॉलिटिक्स की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से काफ़ी अलग हैं। ये चार देश हैं पाकिस्तान, तुर्की, क़तर और इंडोनेशिया। इन देशों ने रक्षा उत्पादन, रिसर्च और डिफेंस टेक्नॉलजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए जिस बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे 'बद्र समझौता ज्ञापन' या बद्र एमओयू नाम दिया गया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इससे कुछ ही हफ़्ते पहले पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' हुआ था। मध्य-पूर्व में जारी संघर्षों और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच महज कुछ हफ़्तों के ये दो बड़े रक्षा समझौते अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई बहस छेड़ रहे हैं।
पाकिस्तान में जहाँ इसे रक्षा उद्योग के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है, वहीं भारत में भी इस नए समीकरण के सामरिक प्रभावों पर क़रीब नज़र रखी जा रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या खाड़ी देशों से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक कोई नया सैन्य ब्लॉक आकार ले रहा है? 'बद्र एमओयू' सऊदी अरब की अगुवाई वाले 'मक्का पैक्ट' से किस तरह अलग है और भारत के प्रमुख रक्षा साझेदार इंडोनेशिया का इस समझौते में शामिल होना नई दिल्ली के हितों को कैसे प्रभावित करेगा?
दोहा में हस्ताक्षरित 'बद्र एमओयू' क्या है?
क़तर की डिफेंस मिनिस्ट्री ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि, रणनीतिक साझेदारी और संयुक्त सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता के तहत दोहा में 'बद्र' समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस अवसर पर क़तर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख़ सऊद बिन अब्दुल रहमान बिन हसन अल थानी, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाज़ा मुहम्मद आसिफ़, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री भी मौजूद थे।
इस समझौते का सीधा मक़सद चारों देशों के बीच डिफ़ेंस प्रोडक्शन को बढ़ावा देना, टेक्नॉलजी ट्रांसफ़र करना और आधुनिक डिफ़ेंस ज़रूरतों के मुताबिक़ स्वदेशी डिफ़ेंस इंडस्ट्री को खड़ा करना है। क़तर के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह समझौता वित्तीय नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चारों देशों की अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ लाकर मित्र देशों की रक्षा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
सम्बंधित ख़बरें
बांग्लादेश की साजेक घाटी में फंसे 2,000 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया :
ताइवान की संसद में 42 फीसदी महिलाएं: 80 साल पुराने आरक्षण मॉडल ने बदली तस्वीर, एशिया में सबसे आगे
पत्रकार के हाथों में युगांडा के ऐतिहासिक टोरो साम्राज्य की कमान, साल 1993 में बहाल हुई थी राजशाही
विवेक ओझा पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा के प्रसिद्ध टोरो साम्राज्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां एक पेशेवर पत्रकार को राजशाही का नेतृत्व सौंपा जा रहा है। देश में दशकों पहले समाप्त कर दी गई इस पारंपरिक व्यवस्था…
सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का यमन में हवाई हमला, होदेइदाह के हूथी सैन्य ठिकाने बने निशाना
रियाद/सना : लाल सागर में सऊदी-संबंधित जहाजों पर हुए हमलों और समुद्री तनाव के बीच सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हूथी-नियंत्रित होदेइदाह प्रांत में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। गठबंधन ने कहा कि कार्रवाई का…
