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'फूलों की घाटी' की ऊंची चोटियों पर चार दिन से आग का तांडव, सेना की मदद के लिए सरकार को लिखा पत्र

देहरादून : उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध 'फूलों की घाटी' के बफर जोन क्षेत्र में स्थित ऊंची चोटियों के जंगलों में पिछले चार दिन से आग लगी हुई है। वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन…

Ragwendra P Singh
January 13, 2026
3 min read
'फूलों की घाटी' की ऊंची चोटियों पर चार दिन से आग का तांडव, सेना की मदद के लिए सरकार को लिखा पत्र

देहरादून : उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध 'फूलों की घाटी' के बफर जोन क्षेत्र में स्थित ऊंची चोटियों के जंगलों में पिछले चार दिन से आग लगी हुई है। वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के कारण टीम को पीछे हटना पड़ा। जिला प्रशासन ने आग पर काबू पाने के सेना से मदद के लिए सरकार को पत्र लिखा है।

 

जिले में समुद्र तल से लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पुलना और भ्यूंडार गांव के ठीक सामने की पहाड़ियों पर 9 जनवरी से आग धधक रही है। आग की गंभीरता को देखते हुए वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई थी। विभाग ने सर्वप्रथम स्थानीय ग्राम पुलना के महिला मंगल दल और अन्य ग्रामीणों से सहयोग की अपील की, ताकि सामूहिक प्रयासों से आग को बुझाया जा सके। हालांकि, आग वाले स्थान के अत्यधिक दुर्गम और जोखिम भरा होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाने में असमर्थता व्यक्त की।

 

ग्रामीणों का कहना था कि ऐसी खड़ी और खतरनाक पहाड़ियों पर जाना जीवन को सीधे तौर पर संकट में डालना है। विभागीय टीम ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ने का निर्णय लिया और दांडीसाल के रास्ते लक्ष्मण गंगा को पार किया,लेकिन जैसे-जैसे टीम ऊपर की ओर बढ़ी, प्रकृति की चुनौतियों ने रास्ता रोक दिया। भीषण ठंड के कारण मार्ग में पड़ने वाले झरने पूरी तरह जम चुके हैं, जिससे चट्टानों पर बर्फ की चादर बिछ गई है और फिसलन बढ़ गई है। पहाड़ियों के एकदम सीधे और खड़े (वर्टिकल) होने के कारण टीम 2 किलोमीटर से आगे नहीं बढ़ सकी और सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस लौटना पड़ा।

 

इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इन चोटियों तक पैदल पहुंचना फिलहाल नामुमकिन है। स्थानीय जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि यदि आग दोबारा फैलती है, तो इसे बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर ही अंतिम सहारा होगा। फिलहाल वन विभाग की टीम स्थिति पर नजरन रखे हुए है।

 

जिला अधिकारी गौरव कुमार ने बताया की फूलों की घाटी के पीछे के पर्वतों में आग लगने की सूचना मिली है जिसमे वन विभाग की और से आग बुझाने की चुनौतियों को देखते हुए सेना की मदद पर विचार किया जा रहा है जिसके लिए जिला प्रशासन ने शासन को पत्र लिखा है।सेना की ओर से आग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है जिसके बाद आग बुझाने का कार्य शुरू किया जाएगा।

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