नेपाल के प्रधानमंत्री के बिना बोले ही संसद के पहले अधिवेशन का अंत
काठमांडू : नेपाल में हुए आम निर्वाचन के बाद संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कोई भाषण नहीं दिया। नेपाल की संसद का पहला अधिवेशन बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही शनिवार से समाप्त हो गया है। बालेन्द्र…

काठमांडू : नेपाल में हुए आम निर्वाचन के बाद संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कोई भाषण नहीं दिया। नेपाल की संसद का पहला अधिवेशन बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही शनिवार से समाप्त हो गया है।
बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में जेनजी आंदोलन के बल पर हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद करीब दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनी। ऐसे में यह जानने को लेकर व्यापक उत्सुकता थी कि प्रधानमंत्री शाह संसद के पहले अधिवेशन में क्या बोलेंगे।
आमतौर पर चुनाव के बाद बनने वाले प्रधानमंत्री संसद को संबोधित करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं, मूल्यों और नीतियों की जानकारी देते हैं। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है, फिर भी अतीत में यह एक स्थापित परंपरा रही है।
नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने शनिवार को समाप्त हुए संसद के पहले अधिवेशन के दौरान अपने ही जैसे देशभर से चुने गए सांसदों के सामने सरकार की नीति और मूल्यों को प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं समझा।
27 मार्च को प्रधानमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद बालेन्द्र शाह ने आगामी 100 दिनों में लागू किए जाने वाले प्रशासनिक सुधारों के 100 बिंदुओं वाला कार्यसूची पारित कर सार्वजनिक कर दी है। इस कार्यसूची में नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में संशोधन जैसे कई कार्य शामिल हैं, जिनके लिए संसद का सहयोग आवश्यक होगा।
इसके बावजूद, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में पारित इस कार्यसूची को संसद में पेश तक नहीं किया। इसे औपचारिक रूप से संसद के संज्ञान में भी नहीं लाया गया। परिणामस्वरूप, अन्य निर्वाचित सांसदों को भी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही सरकार की 100-दिवसीय योजना और उसकी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करनी पड़ी।
संसदीय व्यवस्था के जानकार प्रधानमंत्री के इस तरह संसद में न बोलने को ‘असामान्य’ मानते हैं। संघीय संसद सचिवालय के पूर्व महासचिव मनोहर प्रसाद भट्टराई के अनुसार, आम चुनाव के बाद संसद के पहले अधिवेशन में प्रधानमंत्री द्वारा संबोधन करने की परंपरा रही है। इस परंपरा के विपरीत पूरे अधिवेशन के दौरान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के मौन रहने पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया।
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