ट्रंप ने नहीें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कराया सीजफायर, शैडो ब्रोकर बनकर किया ये कारनामा
Iran US Ceasefire : अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई दो हफ्ते की युद्धविराम की प्रक्रिया में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अहम भूमिका निभाई है। इस पूरी कूटनीतिक सफलता के पीछे पर्दे के पीछे छिपे इस कूटनीतिज्ञ का…

Iran US Ceasefire : अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई दो हफ्ते की युद्धविराम की प्रक्रिया में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अहम भूमिका निभाई है। इस पूरी कूटनीतिक सफलता के पीछे पर्दे के पीछे छिपे इस कूटनीतिज्ञ का नाम उभर कर सामने आया है, जिसे कई रिपोर्ट्स ने ‘शैडो ब्रोकर’ का खिताब दिया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कड़े रुख और धमकियों के बीच, वेंस ने अपने सूझबूझ और रणनीति से इस युद्धविराम को संभव बनाया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव कम हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के सख्त बयानों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बावजूद, जेडी वेंस ने पर्दे के पीछे से बातचीत का जिम्मा संभाला। उन्होंने न केवल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ मिलकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क किया, बल्कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता भी खोल दिया। माना जाता है कि वेंस ने ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ रणनीति अपनाई, जिसमें अमेरिका का कठोर रुख और उनके मध्यम रवैये का मेल था। इस रणनीति के तहत, ईरान पर दबाव भी बनाया गया और साथ ही वार्ता का मोड भी खुला रखा गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वेंस ने पाकिस्तान के उच्चस्तरीय नेताओं और ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर, युद्धविराम की शर्तें तय करने में भूमिका निभाई। इससे पहले भी यह साफ हो चुका था कि वेंस इस प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन अब माना जा रहा है कि उनकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण थी।
‘शांति दूत’ की भूमिका में वेंस
मार्च के मध्य में जब ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा था कि युद्धविराम संभव है, तब जेडी वेंस ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत शुरू कर दी। वेंस, जो पहले इराक युद्ध में भी भाग ले चुके हैं, इस युद्ध को लेकर अधिक उत्साहित नहीं थे। उनका मानना था कि यह युद्ध अमेरिका के संसाधनों और आर्थिक ऊर्जा का बर्बादी है। बावजूद इसके, उन्हें इस काम से बाहर नहीं किया गया, बल्कि ट्रंप के करीबी सलाहकार के रूप में उनका स्थान और मजबूत हुआ।
ईरान ने क्यों किया वेंस पर भरोसा?
ईरान पहले अमेरिका के कई प्रतिनिधियों से निराश हो चुका था, विशेषकर स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ हुई बातचीत के बाद। इनसे सीधे संवाद करने से इनकार कर चुका था। ऐसे में, जेडी वेंस एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आए, क्योंकि उनके रुख में युद्ध के प्रति सख्ती की बजाय संतुलित नजरिया था। उनका सीधा संपर्क ट्रंप से था, जो उनके सामने विश्वसनीयता बढ़ाता था। अमेरिकी अधिकारियों का भी मानना था कि यदि ईरान वेंस के साथ समझौता नहीं करता, तो आगे कोई डील संभव नहीं थी।
जब ट्रंप अपने सार्वजनिक बयानों में जोर देकर कह रहे थे कि वह सैन्य कार्रवाई करेंगे और धमकियों का दौर चला रहा था, तभी वेंस पर्दे के पीछे सक्रिय थे। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और ईरानी अधिकारियों के साथ मिलकर सीजफायर की शर्तें तय करने में भूमिका निभाई। ट्रंप ने भी इस काम का समर्थन किया, जिससे वेंस की भूमिका और भी मजबूत हुई।
इस सफल पहल के बाद, जेडी वेंस की स्थिति अमेरिकी प्रशासन में और अधिक मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि आगे भी वे इस मामले में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेष रूप से, इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ता में उनकी मौजूदगी को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और समझौते पर चर्चा होगी।
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