चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ बनाने की मांग, CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र; दक्षिण भारत के राज्यों को होगा फायदा

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार (4 नवंबर, 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग की है। यह तमिलनाडु की लंबे समय से लंबित मांग है, जिसे राज्य ने पहली बार 1980 में उठाया था।
दक्षिण भारत के राज्यों को होगा फायदा
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ स्थापित होने से न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे दक्षिण भारत के राज्यों को न्याय तक आसान पहुंच मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह देश के संघीय ढांचे (federal character) को भी मजबूत करेगा।
संविधान के अनुच्छेद 130 और 32 का हवाला
सीएम विजय ने संविधान के अनुच्छेद 130 का हवाला दिया, जो राष्ट्रपति की मंजूरी से सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली के बाहर अन्य स्थानों पर बैठक करने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सभी नागरिकों को है, लेकिन दिल्ली की भौगोलिक दूरी और यात्रा-मुकदमेबाजी के खर्च के कारण दक्षिण भारत के लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए यह व्यावहारिक रूप से कठिन हो गया है।
2007 में खारिज हो चुका है प्रस्ताव
पत्र में याद दिलाया गया है कि 7 अगस्त, 2007 को सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट ने चेन्नई में पीठ स्थापित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जबकि तमिलनाडु सरकार ने जजों के आवास सहित आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। सीएम विजय ने 2016 के 'वी. वसंतकुमार बनाम एच.सी. भाटिया' मामले का भी जिक्र किया, जिसमें क्षेत्रीय पीठों की स्थापना का मुद्दा पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजा गया था।
संसदीय समितियों और विधि आयोग की सिफारिशें
मुख्यमंत्री ने 2004, 2006, 2008 और 2021 की संसदीय स्थायी समितियों की सिफारिशों तथा विधि आयोग की रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें स्थायी क्षेत्रीय पीठों की आवश्यकता दोहराई गई है। उन्होंने इस चिंता का भी खंडन किया कि क्षेत्रीय पीठें न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करेंगी, क्योंकि प्रशासनिक नियंत्रण भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास ही रहेगा।
चेन्नई की कानूनी विरासत
सीएम विजय ने कहा कि 1862 में स्थापित मद्रास उच्च न्यायालय देश के सबसे पुराने चार्टर्ड उच्च न्यायालयों में से एक है और चेन्नई के पास दक्षिणी राज्यों की सेवा के लिए आवश्यक कानूनी विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा मौजूद है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को फिर से सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाएं और अनुकूल निर्णय की सुविधा प्रदान करें।
