‘खुद निकलो या निकाल दिए जाओगे’, इज़राइली सेना को IRGC प्रमुख ने दिया अल्टीमेटम! कहा- दक्षिणी लेबनान खाली करो, वरना भुगतना होगा अंजाम
तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इज़राइली सेना को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास केवल दो विकल्प हैं या तो वह…

तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल कानी ने दक्षिणी लेबनान में तैनात इज़राइली सेना को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास केवल दो विकल्प हैं या तो वह स्वेच्छा से पीछे हट जाए या फिर उसे बलपूर्वक और अपमानजनक तरीके से बाहर निकाला जाएगा।
ईरान की सरकारी समाचार संवाद समिति प्रेसटीवी के अनुसार, रविवार को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में इस्माइल कानी ने हिब्रू भाषा में इज़राइली सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे दक्षिणी लेबनान से नहीं हटते हैं, तो वर्ष 2000 जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है, जब इज़राइल को लंबे कब्जे के बाद लेबनान से पीछे हटना पड़ा था।
कानी ने कहा, “यदि आप अपने कदमों से दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ते, तो आपको हार और अपमान के साथ वहां से निकाला जाएगा। फैसला आपके हाथ में है।”
आईआरजीसी कमांडर ने हालिया संघर्षों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में इज़राइली सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि कम समय में बड़ी संख्या में इज़राइली सैनिक हताहत हुए हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब लेबनान-इज़राइल सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि इज़राइल युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखे हुए है।
वहीं, हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइली हमलों के जवाब में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज करने का दावा किया है। संगठन का कहना है कि उसने हाल के दिनों में कई इज़राइली सैनिकों को निशाना बनाया है।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए कूटनीतिक समझौते के बाद लेबनान में संघर्ष कम होने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि युद्धविराम उल्लंघन जारी रहे, तो क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
उधर, इज़राइली नेतृत्व ने संकेत दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपनी सुरक्षा नीति में किसी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई उनके सुरक्षा हितों से जुड़ी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों की कड़ी बयानबाजी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष को नियंत्रित करने और स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करने की कोशिशों में जुटा हुआ है।
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