केरल में वीडी सतीशन कल लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ, एक दशक बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी
नई दिल्ली : सतीशन दामोदर मेनन वडस्सेरी (वीडी सतीशन) सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य की सत्ता में कांग्रेस की वापसी होने जा रही है। इससे पहले वर्ष 2011-2016 तक कांग्रेस के ओमन…

नई दिल्ली : सतीशन दामोदर मेनन वडस्सेरी (वीडी सतीशन) सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य की सत्ता में कांग्रेस की वापसी होने जा रही है। इससे पहले वर्ष 2011-2016 तक कांग्रेस के ओमन चांडी राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। शपथ ग्रहण समारोह सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।
राजधानी तिरुवनंतपुरम में समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संभावना जताई जा रही है कि वीडी सतीशन के साथ पूरा मंत्रिमंडल शपथ ले सकता है। संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के घटक दलों के बीच लगातार बैठकें जारी हैं, जिनमें विभिन्न सहयोगी दलों को मंत्रालयों के बंटवारे और मंत्रियों की संख्या को लेकर चर्चा हो रही है।
शपथ ग्रहण समारोह में करीब एक लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देख रही है। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री भी समारोह में मौजूद रहेंगे।
दरअसल, 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इनमें कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीती हैं। यह परिणाम राज्य की उस पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को दर्शाता है, जिसमें हर पांच वर्ष पर सत्ता यूडीएफ और वाम मोर्चे के बीच बदलती रही है। पिछले दस वर्षों से राज्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में था।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले लगभग दस दिनों से दिल्ली और केरल में लगातार राजनीतिक मंथन चल रहा था। अंततः कांग्रेस आलाकमान ने वीडी सतीशन के नाम पर सहमति बनाई। निर्णायक दौर तब शुरू हुआ जब केसी वेणुगोपाल को दिल्ली स्थित राहुल गांधी के आवास पर बुलाया गया। सूत्रों के अनुसार करीब तीन घंटे चली बैठक में राहुल गांधी ने नेतृत्व के अंतिम फैसले की जानकारी दी और सतीशन के नाम पर मुहर लगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पार्टी के भीतर आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला से भी बातचीत की, जिन्होंने कथित तौर पर इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद मुकुल वासनिक, अजय माकन, जयराम रमेश और दीपा दासमुंशी सहित कई वरिष्ठ नेता खरगे के आवास पर एकत्र हुए, जहां सतीशन के नाम की औपचारिक घोषणा की गई। इसके साथ ही पार्टी के भीतर जारी नेतृत्व को लेकर असमंजस समाप्त हो गया।
छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री पद तक का सफर
वीडी सतीशन का जन्म वर्ष 1964 में कोच्चि के निकट नेट्टूर में हुआ था। पेशे से वकील रहे सतीशन ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और धीरे-धीरे केरल कांग्रेस की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई।
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) से की। छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वे यूथ कांग्रेस से जुड़े और संगठन में तेजी से उभरते नेता के रूप में पहचान बनाई। सतीशन को पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण का करीबी और निष्ठावान समर्थक माना जाता रहा है।
सतीशन का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। 1990 के दशक के मध्य में उन्होंने पहली बार परवूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इस असफलता को अपनी राजनीतिक यात्रा का अंत नहीं बनने दिया और संगठन में लगातार सक्रिय रहकर अपनी मजबूत पहचान बनाई।
उन्होंने पहली बार वर्ष 2001 में परवूर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2006, 2011, 2016, 2021 और 2026 में लगातार जीत दर्ज करते हुए वे राज्य राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। इस प्रकार विधानसभा की राजनीति में उनका सफर 25 वर्षों से अधिक का हो चुका है।
हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में सतीशन ने परवूर सीट से शानदार जीत दर्ज की। उन्हें कुल 78,658 वोट मिले और उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार ईटी टायसन मास्टर को 20,600 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ वे लगातार छठी बार विधायक बने।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वीडी सतीशन की साफ-सुथरी छवि, प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और मजबूत संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें राज्य की राजनीति में अलग पहचान दिलाई है। विपक्ष के नेता के रूप में भी उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा और जनता के बीच सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी। यही कारण है कि उन्हें एक जमीनी और प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि नई सरकार के शुरुआती सौ दिन बेहद अहम होंगे। इसी दौरान सरकार की प्रशासनिक क्षमता, निर्णय लेने की शैली और जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा स्पष्ट होगी।----------------
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