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CEC को मिली ब्लैंकेट इम्यूनिटी पर याचिका दायर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

Poonam Kumari
November 4, 2026
3 min read
CEC को मिली ब्लैंकेट इम्यूनिटी पर याचिका दायर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

अभिषेक सिंह

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 नवंबर, 2026) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई 'ब्लैंकेट इम्यूनिटी' (व्यापक कानूनी छूट) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह याचिकाएं 2023 के उस कानून की धारा 16 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाती हैं, जो चुनाव आयुक्तों को उनके पूरे कार्यकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी किसी भी कानूनी कार्रवाई से छूट देती है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को 18 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

याचिकाओं में क्या हैं मुख्य आरोप?

याचिकाएं RJD सांसद मनोज झा और कार्यकर्ता अरुण कुमार अग्रवाल ने दायर की हैं, जिनमें धारा 16 को 'असंवैधानिक' और 'मनमाना' बताया गया है। मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

* अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों से अधिक सुरक्षा: याचिकाओं में कहा गया है कि यह छूट राष्ट्रपति, सांसदों या सुप्रीम कोर्ट के जजों को मिली सुरक्षा से भी अधिक व्यापक है। राष्ट्रपति पर कार्यकाल के बाद मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन धारा 16 के तहत एक पूर्व चुनाव आयुक्त पर कभी भी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

* भ्रष्टाचार पर भी छूट: धारा 16 का दायरा इतना व्यापक है कि यह भ्रष्टाचार, जालसाजी और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में भी किसी भी प्रकार की कार्रवाई को रोकता है।

* न्यायिक समीक्षा पर हमला: याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि यह प्रावधान संवैधानिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र को सीमित करता है और 'बेसिक स्ट्रक्चर' (मूल ढांचे) का हिस्सा माने जाने वाले न्यायिक समीक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है।

* संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं: याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 324 का हवाला दिया, जो चुनाव आयोग का संचालन करता है, लेकिन CEC या चुनाव आयुक्तों को ऐसी कोई छूट नहीं देता। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सुरक्षित कार्यकाल तो दिया, लेकिन मुकदमे से छूट कभी नहीं दी।

* वैकल्पिक उपाय मौजूद: याचिकाओं में कहा गया है कि झूठी शिकायतों से बचाने के लिए कम सख्त उपाय भी मौजूद हैं, जैसे प्रारंभिक न्यायिक जांच। यह भी तर्क दिया गया कि बिना इस छूट के भी चुनाव आयोग दशकों से प्रभावी ढंग से काम कर रहा है।

सरकार और चुनाव आयोग को जवाब देना है

अब केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को इन याचिकाओं पर अपना पक्ष रखना है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ आरोपों की जांच की मांग भी उठ रही है। हालांकि, याचिकाओं में सीधे तौर पर वर्तमान CEC के खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए गए हैं, बल्कि कानूनी प्रावधान को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसकी जवाबदेही के बीच संतुलन से जुड़ा एक अहम संवैधानिक सवाल उठाता है, जिस पर आने वाले दिनों में सुनवाई होगी।

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