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भारत का परचम: ताशकंद में आयोजित 58वें अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) में सभी 4 भारतीय छात्रों ने जीता गोल्ड मेडल

विवेक ओझा/ नई दिल्ली/मुंबई: भारत के युवा वैज्ञानिकों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रौशन किया है। उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में 10 से 19 जुलाई 2026 तक आयोजित हुए 58वें अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) में भारतीय टीम ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 4 स्वर्ण पदक (Gold Medals) अपने नाम किए हैं। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने पदक तालिका में चीन और वियतनाम के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया है।

कौन हैं ये चार होनहार?

भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इस चार सदस्यीय टीम के सभी छात्रों ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इनमें भुवनेश्वर (ओडिशा) से देबदत्त प्रियदर्शी, मंडी गोबिंदगढ़ (पंजाब) से हर्षित सिंगला, दिल्ली से कबीर छिल्लर और हैदराबाद (तेलंगाना) से संदीप कुची शामिल हैं। गौरतलब है कि कबीर छिल्लर ने हाल ही में जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) 2026 की परीक्षा में भी ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

चुनौतियों से भरा था ओलंपियाड

इस साल के ओलंपियाड में 93 देशों के 363 छात्रों ने हिस्सा लिया था, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा IChO बनाता है। प्रतियोगिता में सैद्धांतिक (Theoretical) और प्रायोगिक (Experimental) दोनों चरण बेहद कठिन थे। छात्रों को पौधों के अर्क से बने नीले घोल की संरचना पहचानने, कोयले की खदान से मिले पीले पत्थर का विश्लेषण करने और अज्ञात अभिकर्मकों (Reagents) का उपयोग करके मेटल कॉम्प्लेक्स (Metal Complex) के संश्लेषण जैसे जटिल टास्क दिए गए थे। भारतीय छात्रों ने अपनी बेहतरीन विश्लेषणात्मक क्षमता और प्रयोगशाला कौशल (Lab Skills) से इन सभी चुनौतियों को पार किया।

HBCSE का मार्गदर्शन

इन छात्रों को इस मुकाम तक पहुंचाने में होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE – TIFR), मुंबई का अहम योगदान रहा है। टीम का नेतृत्व आईआईएसईआर (IISER) कोलकाता के प्रोफेसर सुभजीत बंद्योपाध्याय (हेड मेंटर) और डॉ. इंद्राणी दास सेन ने किया। जाने से पहले सभी छात्रों को HBCSE में कड़ी ट्रेनिंग और ओरिएंटेशन कैंप से गुजरना पड़ा था।

यह 27वीं बार था जब भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में हिस्सा लिया, लेकिन सभी चारों प्रतिभागियों का गोल्ड मेडल जीतना भारतीय विज्ञान शिक्षा के इतिहास में पहली बार हुआ है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने इस शानदार सफलता पर छात्रों और उनके मेंटर्स को बधाई दी है। यह जीत बताती है कि भारत का युवा ‘नॉलेज इकॉनमी’ (Knowledge Economy) में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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