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पीएम मोदी ने 28 साल की औसत उम्र वाले युवाओं के स्काईरूट (Skyroot) स्पेस स्टार्टअप की अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: भारत के अंतरिक्ष इतिहास (Space History) में एक और स्वर्णिम पन्ना जुड़ गया है। देश के पहले प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ (Skyroot Aerospace) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप की पूरी टीम को बधाई दी है, जिनकी औसत आयु मात्र 28 वर्ष है।

युवाओं की शक्ति का प्रमाण

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस सफलता की सराहना करते हुए कहा, “स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर मेरी हार्दिक बधाई। यह गर्व की बात है कि इस मिशन को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की औसत उम्र सिर्फ 28 साल है। यह साबित करता है कि जब भारत के युवाओं को सही अवसर और नीतियां मिलती हैं, तो वे आकाश की ऊंचाइयों (Literal and Figurative) को भी पार कर सकते हैं।”

विक्रम-1: निजी क्षेत्र का पहला ऑर्बिटल लॉन्च

‘विक्रम-1’ का यह लॉन्च इसलिए भी खास है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी भारतीय निजी कंपनी (Private Company) ने देश की धरती से कोई ऑर्बिटल लॉन्च (Orbital Launch) सफलतापूर्वक किया है। इस रॉकेट ने अपने साथ दो छोटे उपग्रहों (SCOPE और Grahaa) को लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया है। इससे पहले स्काईरूट ने नवंबर 2022 में ‘विक्रम-एस’ (Vikram-S) के साथ एक सब-ऑर्बिटल उड़ान का सफल परीक्षण किया था।

अंतरिक्ष सुधारों (Space Reforms) का असर

यह सफलता भारत सरकार द्वारा साल 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों का सीधा परिणाम है। सरकार ने ‘इन-स्पेस’ (IN-SPACe) जैसी नोडल एजेंसी बनाकर निजी कंपनियों के लिए इसरो (ISRO) की अत्याधुनिक सुविधाओं के दरवाजे खोल दिए थे। विक्रम-1 के रॉकेट मोटर्स की कास्टिंग और परीक्षण भी इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर में ही किए गए। इसरो ने इस पूरी प्रक्रिया में स्काईरूट की टीम को तकनीकी सलाह और सुरक्षा मार्गदर्शन प्रदान किया।

रक्षा और अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि स्काईरूट की यह सफलता भारत को वैश्विक कमर्शियल स्पेस मार्केट (Commercial Space Market) में एक मजबूत प्रतियोगी के रूप में स्थापित करेगी। छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने का यह किफायती और स्वदेशी तरीका भविष्य में भारत के लिए अरबों डॉलर के विदेशी निवेश और राजस्व का रास्ता भी खोलेगा।

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