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नई दिल्ली में संसद के आगामी मॉनसून सत्र को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी; विपक्ष ने घेराव की बनाई रणनीति विवेक ओझा

नई दिल्ली: संसद के आगामी मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले देश की राजधानी नई दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्र को सुचारू रूप से चलाने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से संसदीय कार्य मंत्री ने सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस बार का मॉनसून सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है, क्योंकि विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की व्यापक रणनीति तैयार कर ली है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण और लंबित बिल पारित कराने के एजेंडे के साथ उतरेगी, जिसमें आर्थिक सुधार, डिजिटल डेटा संरक्षण और नए श्रम कानूनों से जुड़े विधेयक शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि सभी दलों को भरोसे में लेकर संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में बिना किसी व्यवधान के कामकाज सुनिश्चित किया जाए। सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री की मौजूदगी की भी संभावना है, जहां वे विपक्ष से सकारात्मक सहयोग की अपील कर सकते हैं।

दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) ने सरकार को घेरने के लिए अपने तरकश के सभी तीर निकाल लिए हैं। विपक्ष के नेताओं ने हाल ही में एक संयुक्त बैठक कर उन मुद्दों की सूची तैयार की है जिन पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा बढ़ती महंगाई (Inflation) और आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतें हैं। इसके अलावा, देश भर में लगातार सामने आ रहे बेरोजगारी के आंकड़े, युवाओं के भविष्य से जुड़े विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET) के पेपर लीक विवाद, और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने वाला है।

विपक्ष की मांग है कि संसद में नियम 267 के तहत सभी कामकाज रोककर इन ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए। विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और वे तब तक संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चलने देंगे, जब तक प्रधानमंत्री सदन में आकर इन विषयों पर सीधा जवाब नहीं देते।

संसदीय लोकतंत्र में मॉनसून सत्र का अपना एक विशेष महत्व होता है क्योंकि यह बजट सत्र के बाद सरकार की नीतियों की समीक्षा का सबसे बड़ा मंच प्रदान करता है। जहां एक ओर सरकार जन-कल्याणकारी बिलों को पास कराकर अपनी उपलब्धियां गिनाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनता की आवाज बनकर सरकार की खामियों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कोई आम सहमति बन पाती है, या फिर यह मॉनसून सत्र भी पिछले कई सत्रों की तरह हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा।

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