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मानसून सत्र को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सभी दलों से अपील: ‘हंगामे के बजाय हो सार्थक चर्चा, सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी’

राघवेंद्र प्रताप सिंह/  नई दिल्ली: संसद का आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) 22 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें देश का पूर्ण आम बजट 2026-27 भी पेश किया जाएगा। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्ष के आक्रामक तेवरों को देखते हुए इस सत्र के बेहद हंगामेदार होने के प्रबल आसार हैं। सदन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला ने आज सभी राजनीतिक दलों के नेताओं (Floor Leaders) से एक विशेष और कड़ी अपील की है।

सकारात्मक और नीतिगत बहस पर जोर

लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी अपील में कहा कि “लोकतंत्र में असहमति का पूरा सम्मान है, लेकिन सदन का कीमती समय देशहित की नीतियों, आम बजट के विश्लेषण और जनता के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा के लिए होना चाहिए।” ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि वेल में आकर नारेबाजी करना, तख्तियां लहराना और पीठासीन अधिकारी की कुर्सी के करीब आकर कार्यवाही बाधित करना किसी भी रूप में संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं (जैसे शून्य काल, प्रश्न काल और कार्यस्थगन प्रस्ताव) के तहत अपने मुद्दे उठाएं, और अध्यक्ष के रूप में वे उन्हें अपनी बात रखने का पूरा समय देंगे।

विपक्ष (INDIA गठबंधन) की आक्रामक तैयारी

  • स्पीकर की इस अपील के पीछे की मुख्य वजह विपक्ष का मजबूत संख्याबल और उनका आक्रामक एजेंडा है। लोकसभा चुनावों के बाद मजबूत होकर उभरा इंडिया (INDIA) गठबंधन इस बार सरकार को बैकफुट पर धकेलने की पूरी तैयारी कर चुका है।
    विपक्ष के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं:
  • नीट (NEET-UG) और अन्य परीक्षाओं में हुआ व्यापक घोटाला और पेपर लीक।
  • बढ़ती महंगाई (Inflation) और ऐतिहासिक बेरोजगारी के मुद्दे।
  • हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) का विरोध।
  • जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा और अग्निपथ योजना की वापसी।

सरकार का रुख

वहीं संसदीय कार्य मंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए आश्वस्त किया है कि सरकार अध्यक्ष की अनुमति से हर उस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो देश की जनता से जुड़ा हो। देश की जनता भी उम्मीद कर रही है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि संसद में सड़क की राजनीति करने के बजाय, बजट और देश के भविष्य को तय करने वाले कानूनों पर सार्थक और बौद्धिक बहस करेंगे। 22 जुलाई से शुरू होने वाला यह सत्र नई सरकार के लिए पहली बड़ी संसदीय अग्निपरीक्षा साबित होगा।

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