Trending

भारत-ब्रिटेन संबंधों में स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत: ऐतिहासिक FTA आधिकारिक रूप से लागू, पीएम मोदी ने बताया किसानों और MSMEs के लिए ‘गेम चेंजर’

विवेक ओझा/  नई दिल्ली/लंदन: वर्षों की लंबी, जटिल और गहन कूटनीतिक वार्ताओं के बाद, भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (India-UK Free Trade Agreement – FTA) आज से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं के बीच इसे दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह समझौता न केवल व्यापारिक बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश

इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों की जनता को बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “यह सिर्फ एक व्यापारिक कागज़ नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास का एक मजबूत पुल है। यह FTA भारत के करोड़ों किसानों, छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) तथा हमारे प्रतिभाशाली आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।” ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भी इस मौके पर बयान जारी कर भारत को अपना सबसे अहम रणनीतिक भागीदार बताया।

समझौते से भारत को क्या मिलेगा लाभ?

  • इस FTA के तहत, ब्रिटेन ने भारतीय निर्यातकों के लिए अपने बाजारों के दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं।
  • 1. शून्य आयात शुल्क (Zero Duty): भारत से निर्यात होने वाले लगभग 90% उत्पादों—जिनमें मुख्य रूप से कपड़ा (Textiles), चमड़े के उत्पाद, आभूषण, समुद्री उत्पाद और कृषि उपज शामिल हैं—पर ब्रिटेन ने आयात शुल्क (Import Duty) शून्य कर दिया है। इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजार में चीन और बांग्लादेश के उत्पादों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे।
  • 2. आईटी पेशेवरों को फायदा: भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और स्वास्थ्य कर्मियों (नर्सों और डॉक्टरों) के लिए ब्रिटेन ने वीजा नियमों में भारी ढील दी है, जिससे उन्हें वहां काम करने के अधिक अवसर मिलेंगे।
  • 3. MSMEs को नई उड़ान: छोटे भारतीय व्यापारी अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए सीधे ब्रिटिश उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद बेच सकेंगे।

ब्रिटेन को क्या मिलेगा?

इसके बदले में, भारत ने भी अपने बाजारों को ब्रिटिश कंपनियों के लिए सुलभ बनाया है। भारत ने ब्रिटिश लग्जरी कारों, स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky), हाई-टेक मशीनरी और फार्मास्युटिकल उत्पादों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क (जो पहले 150% तक था) में भारी कटौती की है। इसके अलावा, ब्रिटिश बैंकों और कानूनी फर्मों को भी भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं देने की आंशिक अनुमति दी गई है।

2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

वर्तमान में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 38 बिलियन पाउंड का है। वाणिज्य मंत्रालय और उद्योग विशेषज्ञों (CII और FICCI) का अनुमान है कि इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना होकर 75 से 80 बिलियन पाउंड तक पहुंच जाएगा। ब्रेक्जिट (Brexit) के बाद यूरोप से अलग हुए ब्रिटेन के लिए भारत जैसा विशाल बाजार संजीवनी बूटी के समान है, वहीं भारत के लिए यह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम है।

Related Articles

Back to top button