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बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर आईसीसी बैन का खतरा, सरकार से जांच रोकने की अपील

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड टी20 वर्ल्ड कप 2026 से हटने के मुद्दे पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की सजा से तो बच गया है, लेकिन अब उस पर आईसीसी से बैन का नया खतरा मंडरा रहा है।

इसी वजह से बीसीबी ने अपनी सरकार से गुहार लगाई है। बोर्ड ने सरकार से उस आदेश को वापस लेने की अपील की है, जिसमें बोर्ड के चुनावों की जांच कराने की बात कही गई थी।

बीसीबी के भीतर चल रहे घरेलू प्रशासनिक विवाद अब ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जिस पर आईसीसी की नजर भी टिक सकती है।

साभार : गूगल

यही कारण है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने देश के खेल अधिकारियों से 2025 के बीसीबी चुनावों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए बनाई गई 5 सदस्यीय समिति को समाप्त करने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई चुने हुए बोर्ड के कामकाज में दखल के रूप में देखी जा सकती है।

बांग्लादेश सरकार की नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल ने 11 मार्च को इस समिति का गठन किया था और उसे 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। इस समिति का उद्देश्य चुनावों में गड़बड़ी, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच करना है।

चुनावों के बाद अमीनुल इस्लाम बीसीबी के अध्यक्ष बने थे। इस जांच पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज AKM असदुज्जमां कर रहे हैं। समिति में सरकार, पुलिस, कानून और मीडिया से एक-एक प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

चुनाव के बाद से ही इस प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने औपचारिक रूप से NSC से संपर्क कर इस पूरे चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

उन्होंने पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और कहा कि ढाका के 76 क्लबों में से 50 क्लब जांच के पक्ष में हैं। तमीम ने पहले ही सरकारी हस्तक्षेप का हवाला देते हुए चुनावी दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था।

बीसीबी के बयान से साफ है कि वह इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील क्यों मान रहा है। बोर्ड ने अपने बयान में कहा, “इस मामले को लेकर आईसीसी नेतृत्व के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक बातचीत की गई है।

यह संकेत दिया गया है कि यदि किसी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड के मामलों में हस्तक्षेप माना जाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ढांचे में गवर्नेंस को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो सकती हैं।”

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