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टी20 वर्ल्ड कप में मेजबान टीमों का रहस्य: होम ग्राउंड का फायदा या परेशानी?

होम ग्राउंड का फायदा अक्सर क्रिकेट में बड़ी भूमिका निभाता है। जब कोई टीम अपने घर पर खेलती है, तो उसे न केवल पिच और मौसम जैसी परिस्थितियों की गहरी जानकारी होती है, बल्कि टीम के खिलाड़ी भी उस माहौल में बचपन से खेलते आए हैं।

साभार : गूगल

इन सभी कारणों के चलते मेजबान टीम को हमेशा एक तरह का एडवांटेज मिलता है। लेकिन टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास ने इस कथन को चुनौती दी है। 2007 से अब तक किसी भी टीम ने, जिसने टूर्नामेंट की मेजबानी की, ट्रॉफी जीतने में सफलता नहीं पाई। होम टीमों के लिए यह वाकई एक रहस्य और चुनौती बन गया है।

टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी करने वाली टीमों का रिकॉर्ड

2007 – पहला टी20 वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका ने होस्ट किया, लेकिन टीम सुपर-8 में ही बाहर हो गई।

2009 – इंग्लैंड ने मेजबानी की, लेकिन सेमीफाइनल तक का सफर तय नहीं कर पाया।

2010 – वेस्टइंडीज भी होस्टिंग का लाभ नहीं उठा पाए और टूर्नामेंट में जल्दी बाहर हो गए।

2012 – श्रीलंका होस्ट थी और वह फाइनल तक पहुँच गई, लेकिन ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं हो सकी। फाइनल में वेस्टइंडीज ने उन्हें 36 रनों से हराया।

2014 – बांग्लादेश ने मेजबानी की, लेकिन सुपर-10 से आगे नहीं बढ़ पाए।

2016 – भारत होस्ट थी, लेकिन सेमीफाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। वेस्टइंडीज ने इस बार भी भारत का सपना तोड़ दिया।

2021 – यूएई और ओमान ने संयुक्त रूप से होस्ट किया, लेकिन दोनों टीमें ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गईं।

2022 – ऑस्ट्रेलिया ने मेजबानी की, लेकिन सुपर-12 से आगे नहीं बढ़ पाए।

2024 – यूएसए और वेस्टइंडीज ने संयुक्त रूप से टूर्नामेंट की मेजबानी की, लेकिन दोनों ही सुपर-8 से बाहर हो गए।

इसलिए इतिहास के अनुसार, होस्ट टीमों के लिए टी20 वर्ल्ड कप जीतना हमेशा कठिन साबित हुआ है। अब बात करें 2026 की: इस बार मेजबानी भारत और श्रीलंका कर रहे हैं। श्रीलंका पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है, और भारत पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि टीम इंडिया अभी पूरी तरह टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुई है।

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