जब टी20 विश्व कप बना कूटनीति का मैदान: क्रिकेट से बड़ा हो गया विवाद
क्रिकेट का सबसे छोटा प्रारूप अपने सबसे बड़े मंच पर पहुंच चुका है, लेकिन इस बार टी20 विश्व कप की पहचान चौकों-छक्कों से नहीं, बल्कि मैदान से बाहर उठे तूफान से बन रही है।
भारत और श्रीलंका में शनिवार से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट ने एक भी गेंद फेंके बिना यह साफ कर दिया है कि आधुनिक क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि कूटनीति, सुरक्षा और राजनीति का भी अखाड़ा बन चुका है। आमतौर पर ऐसे मौकों पर चर्चा कप्तानों, फॉर्म और संभावनाओं की होती है। गत चैंपियन भारत, सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में खिताब का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
लेकिन इस बार सुर्खियाँ खिलाड़ियों के बल्ले या गेंद पर नहीं, बल्कि उन फैसलों पर हैं जिन्होंने टूर्नामेंट की पूरी तस्वीर बदल दी। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत में खेलने से इनकार करते हुए बांग्लादेश का टूर्नामेंट से बाहर होना इस विवाद की पहली बड़ी कड़ी बना। बांग्लादेश ने इसे सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा बताया।
विवाद की जड़ उस फैसले में थी, जब बीसीसीआई के निर्देश पर बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजूर रहमान को आईपीएल से बाहर किया गया। इसके बाद बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इनकार कर दिया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया।

मामला यहीं नहीं रुका। क्षेत्रीय राजनीति ने क्रिकेट की सीमाएं लांघीं और पाकिस्तान ने अपने पड़ोसी बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस फैसले को सही ठहराया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला सिर्फ क्रिकेट बोर्डों तक सीमित नहीं रहा।
एक भी मैच शुरू होने से पहले आईसीसी और प्रसारकों की चिंता संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर है। भारत-पाकिस्तान मुकाबले क्रिकेट की वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं और उनकी गैरमौजूदगी का असर सिर्फ दर्शकों की रोमांचक अपेक्षाओं पर ही नहीं, बल्कि राजस्व पर भी पड़ेगा। पाकिस्तान को भी इस फैसले के गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।
इन तमाम सुर्खियों के बीच अगर खेल पर लौटें तो भारत की चुनौती अपेक्षाकृत आसान दिखती है। मौजूदा फॉर्म और संतुलन के आधार पर सूर्यकुमार यादव की टीम के सामने फिलहाल कोई टीम स्पष्ट रूप से बराबरी की नहीं दिखती। पाकिस्तान शनिवार को कोलंबो में नीदरलैंड के खिलाफ खेलेगा, जहां उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
आस्ट्रेलिया, जो विश्व कप टूर्नामेंटों की पारंपरिक धुरंधर रही है, इस बार फिटनेस समस्याओं से जूझ रही है। पैट कमिंस और जोश हेजलवुड के बाहर होने से गेंदबाजी की जिम्मेदारी बेन ड्वारशुइस, जेवियर बार्लेट और नाथन एलिस पर होगी। बल्लेबाजी में हालांकि ट्रेविस हेड, जोश इंगलिस, कप्तान मिचेल मार्श, मार्कस स्टोइनिस और ग्लेन मैक्सवेल जैसे बड़े नाम मौजूद हैं। स्पिन विभाग में मैट कुहनेमन और एडम जम्पा की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
इंग्लैंड की ताकत उसकी विस्फोटक बल्लेबाजी है—हैरी ब्रूक, जोस बटलर, बेन डकेट और फिल साल्ट किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन उन्हें वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी भारतीय स्पिनरों की चुनौती का सामना करना होगा।
दक्षिण अफ्रीका भी प्रबल दावेदारों में शामिल है और भारत के बाद उसके पास शायद दूसरा सबसे संतुलित गेंदबाजी आक्रमण है। कैगिसो रबाडा, एनरिच नॉर्किया, मार्को यानसेन और केशव महाराज विपक्षी बल्लेबाजों के लिए बड़ी परीक्षा होंगे।
बल्लेबाजी में क्विंटन डिकॉक, एडेन माक्ररम, डेविड मिलर, रियान रिकेलटन और ट्रिस्टन स्टब्स का अनुभव टीम को मजबूती देता है। न्यूजीलैंड पिछले एक महीने से भारत में है और यह तैयारी उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
फिन एलेन ने भारत के खिलाफ आखिरी टी20 में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था, जबकि ग्लेन फिलिप्स और डेरिल मिचेल ने भी उपयोगी पारियां खेली हैं। लॉकी फर्ग्युसन की रफ्तार, जैकब डफी की विविधता और कप्तान मिचेल सेंटनर का अनुभव उन्हें खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाता है।
मेज़बान श्रीलंका अपनी सरजमीं पर खेल रहा है और उसके पास वानिंदु हसरंगा, महीष तीक्षणा और दुनिथ वेलालागे जैसे विश्व-स्तरीय स्पिनर हैं। तेज गेंदबाजी में मथीषा पथिराना और दुष्मंता चामीरा किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परेशान कर सकते हैं। इस बार टी20 विश्व कप में पहली बार 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जो इसे वास्तव में वैश्विक आयोजन बनाती हैं।
अमेरिकी टीम में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका मूल के कई खिलाड़ी शामिल हैं। नेपाल के दीपेंद्र सिंह एरी, जिनके नाम एशियाई खेलों में मंगोलिया के खिलाफ नौ गेंदों में सबसे तेज टी20 अर्धशतक का रिकॉर्ड है, भी आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं फुटबॉल प्रेम के लिए मशहूर इटली का क्रिकेट विश्व कप में उतरना इस टूर्नामेंट की बदलती भौगोलिक सीमाओं को दर्शाता है।



