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फॉर्म बनाम किस्मत : यशस्वी जायसवाल का सीमित ओवरों का संघर्ष

भारतीय क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल की कहानी सिर्फ रन और रिकॉर्ड्स की नहीं, बल्कि मौकों की उपलब्धता और समय की विडंबना की भी है।

आंकड़े, प्रदर्शन और क्षमता—तीनों ही कसौटियों पर खरे उतरने के बावजूद जायसवाल का सफर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या केवल फॉर्म ही काफी होता है, या सही वक्त पर किस्मत का साथ भी उतना ही जरूरी है।

तीनों फॉर्मेट का खिलाड़ी कहलाना किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यशस्वी जायसवाल उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट में शतक जड़े हैं।

जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से यह साबित किया कि वह किसी एक फॉर्मेट तक सीमित नहीं हैं। इसके बावजूद, टेस्ट क्रिकेट को छोड़ दें तो सीमित ओवरों के फॉर्मेट में उनकी जगह अब भी पक्की नहीं मानी जा सकती।

साभार : गूगल

28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही में जन्मे यशस्वी जायसवाल रविवार को 24 साल के हो गए। बचपन में ही उनका परिवार मुंबई आ गया था। यहीं उनके मन में क्रिकेटर बनने का सपना जन्मा।

कमजोर आर्थिक हालातों के बीच टेंट में रहने से लेकर मैदान तक पहुंचने का उनका संघर्ष किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। मुंबई की गलियों से निकलकर पहले घरेलू क्रिकेट और फिर भारतीय टीम तक का सफर उन्होंने कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर तय किया।

घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन का नतीजा यह रहा कि 14 जुलाई 2023 को उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला।

उसी साल उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी कदम रखा और 2025 में वनडे टीम में पदार्पण किया। पिछले दो वर्षों में जायसवाल ने खुद को एक विस्फोटक लेकिन भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया है—चाहे लाल गेंद हो या सफेद।

हालांकि, क्रिकेट सिर्फ फॉर्म का खेल नहीं है, किस्मत की भूमिका भी उतनी ही अहम होती है। जायसवाल के पास फॉर्म है, लेकिन किस्मत शायद उतनी मेहरबान नहीं रही।

टी20 में अपनी क्षमता साबित करने के बावजूद उन्हें टी20 विश्व कप 2024 की टीम में तो चुना गया, लेकिन एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इससे भी बड़ी बात यह है कि वह टी20 विश्व कप 2026 की टीम में शामिल ही नहीं हैं।

वनडे फॉर्मेट में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में उन्हें शुभमन गिल की इंजरी की वजह से मौका मिला और उन्होंने आखिरी वनडे में शतक जड़कर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी। अब सवाल यह है कि गिल की वापसी के बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज में उन्हें मौका मिलता है या नहीं।

टेस्ट क्रिकेट ही वह फॉर्मेट है, जहां जायसवाल को लगातार भरोसा मिला है। डेब्यू के बाद से उन्हें नियमित मौके मिले और उन्होंने भारत के साथ-साथ इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की मुश्किल पिचों पर भी रन बनाकर खुद को साबित किया।

आईपीएल में भी उनका बल्ला खूब बोलता है, जहां वह राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं और लीग के सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो जायसवाल का करियर काफी प्रभावशाली रहा है—28 टेस्ट में 2,511 रन, 4 वनडे में 171 रन और 23 टी20 में 723 रन। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या क्षमता की नहीं, बल्कि निरंतर मौके मिलने की है।

फिलहाल यशस्वी जायसवाल को सीमित ओवरों के क्रिकेट में नियमित जगह नहीं मिल पा रही है, लेकिन क्रिकेट में किस्मत हमेशा एक जैसी नहीं रहती।

वह टीम के आसपास बने हुए हैं, चयनकर्ताओं की नजर में हैं और उम्र अभी उनके पक्ष में है। उनका भविष्य उज्ज्वल है और यह उम्मीद करना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में यशस्वी जायसवाल तीनों ही फॉर्मेट में भारतीय टीम की नियमित तस्वीर बनते नजर आएंगे।

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