सेमीफाइनल से पहले बोले श्रीजेश : जीत के बाद भी भारत को रखना होगा पैरों को जमीन पर

जूनियर हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में सात बार की विजेता जर्मनी के खिलाफ खेले जाने वाले मुकाबले से पहले भारतीय टीम को मुख्य कोच पी आर श्रीजेश ने एक बार फिर एक ही संदेश दिया है: काम अभी पूरा नहीं हुआ है और अपने पैर जमीन पर रखने होंगे।

भारत ने क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम को एक बेहद रोमांचक मैच में 4-3 से हराया। मैच आखिरी मिनट में गोल गंवाने के बाद शूटआउट तक गया, लेकिन दो बार के ओलंपिक पदक विजेता श्रीजेश का कहना है कि इस तरह की गलतियों की जर्मनी जैसी शीर्ष टीम के खिलाफ कोई गुंजाइश नहीं है।

श्रीजेश ने कहा, ‘‘बेल्जियम के खिलाफ पहले 45 मिनट हम गोल से पीछे थे और फिर आखिरी मिनट में गोल गंवाना, जिससे मैच शूटआउट तक गया, मुझे अच्छा नहीं लगा। ऐसे मौके बचाने चाहिए थे।’’

साभार : गूगल

भारत के महान गोलकीपर रहे श्रीजेश ने खिलाड़ियों को यह भी समझाया कि अच्छे मूव को फाइनल टच देना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘हम लगातार आक्रमण कर रहे थे और मौके बना रहे थे, लेकिन सर्कल के भीतर गेंद का नियंत्रण नहीं खोना चाहिए। कठिन टीमों के खिलाफ मौके कम मिलते हैं, और जो भी मौके मिले, उन्हें भुनाना होगा।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या लीग चरण में आसान विरोधियों से क्वार्टर फाइनल में दबाव ज्यादा रहा, तो श्रीजेश ने जवाब दिया, ‘‘लीग दौर के मैच सभी के लिए लगभग बराबर होते हैं। कुछ टीमों को कठिन मुकाबला मिल जाता है, लेकिन हमने अपनी टीम का स्तर ऊंचा रखा और उन्हें चुनौती दी कि निर्धारित गोल तक पहुंचें। नॉकआउट चरण में दबाव अलग होता है।’’

भारत ने राउंड रॉबिन चरण में 29 गोल किए और एक भी नहीं गंवाया। लेकिन कोच श्रीजेश ने चेताया कि क्वार्टर फाइनल से अधिक दबाव अब सेमीफाइनल में होगा। ‘‘क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम क्वालीफाई नहीं कर सकी। हम किसी भी टीम को हल्के में नहीं ले सकते। जर्मनी पूरी तैयारी के साथ उतरेगी, इसलिए हमें अपने खेल में सुधार करना होगा।’’

श्रीजेश ने युवा खिलाड़ियों को मैच जीतने के बाद भी याद दिलाया कि काम अभी पूरा नहीं हुआ है और आत्ममुग्धता से बचना जरूरी है। ‘‘मैंने टीम से कहा कि पैर जमीन पर रखें और फोकस अगले मैच पर रखें। सबसे अहम बात यह है कि अच्छे प्रदर्शन से ज्यादा अपनी गलतियों पर ध्यान दें। डी के अंदर की गई गलतियों को सुधारना जरूरी है।’’

उन्होंने यह भी जोर दिया कि ये खिलाड़ी सिर्फ जूनियर विश्व कप खेलने नहीं आए हैं, बल्कि भविष्य में भारतीय टीम का हिस्सा बनेंगे। ‘‘इन्हें इस दबाव का सामना करना आना चाहिए। आगे ओलंपिक, एशियाई खेल, विश्व कप और राष्ट्रमंडल खेल खेलने हैं। अभी यह शुरुआती कदम हैं, और यहां अच्छा प्रदर्शन करने से आगे की राह आसान होगी।’’

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