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बजट 2026-27 पर संसद की मुहर

नई दिल्ली : संसद ने शुक्रवार को वित्त विधेयक 2026-27 को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने ध्वनिमत से इसे लोकसभा को वापस भेज दिया, जिससे एक अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट की प्रक्रिया पूरी हो गई। लोकसभा ने 25 मार्च को 32 संशोधनों के साथ इस विधेयक को पारित किया था। इसके साथ ही राज्यसभा की कार्यवाही 30 मार्च को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी

 

राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा के बाद वित्त विधेयक को लोकसभा को वापस भेज दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दिए। इसके साथ ही संसद से केंद्रीय बजट 2026-27 को मंजूरी मिल गई। इससे पहले सीतारमण ने राज्यसभा में विनियोग (2) विधेयक, 2026 और वित्त विधेयक, 2026 पर चर्चा का संयुक्त जवाब दिया। इसके बाद सदन ने केंद्रीय बजट 2026-27 को अपनी मंजूरी दे दी है।

 

राज्यसभा में दोनों विधयेक पर चर्चा का संयुक्त जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि एक वर्ष (2025) में राजस्व विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 में सुधार किए, और एक नई आयकर प्रणाली शुरू की है, जो अधिक सरल और जिसका पालन करना आसान है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट पर कहा कि सरकार सक्रिय है और बदलती स्थिति पर नजर रख रही है।

 

सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण कई देशों में स्थिति खराब है। भारत में हम इससे अच्छी तरह से निपट रहे हैं। वित्त मंत्री ने राज्यसभा में बताया कि देश में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है, नेताओं को अफवाहें नहीं फैलाना चाहिए। हम सतर्क रहेंगे। राजकोष का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करेंगे। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद डीजल और पेट्रोल की कीमतें अपरिवर्तित हैं।

 

वित्त मंत्री ने सदन में चर्चा के दौरान कहा कि पेंशन प्रशासन प्रणाली (स्पर्श) यह सुनिश्चित करता है कि निधि ठीक समय पर सीधे खातों में ट्रांसफर हो जाएं। पैसा तभी जारी किया जाता है जब राज्य सरकारें भी अपना हिस्सा देती हैं, जिससे यह पक्का होता है कि दोनों ही बिना किसी देरी के ज़मीनी स्तर तक पहुंचें। उन्होंने बताया कि एक बार उपयोग प्रमाण पत्र मिल जाने के बाद, अगली किस्त जारी कर दी जाती है और यह चक्र चलता रहता है।

 

सीतारमण ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा कि कोई भी प्रोजेक्ट संसाधनों का इंतज़ार नहीं करता और फंड्स को बेवजह रोककर नहीं रखा जाता। वित्त मंत्री ने डीएमके सांसद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल पर पार्टी की मीटिंग में डीएमके मौजूद नहीं थी।

 

वित्त मंत्री ने सदन में बताया कि 30 से ज्यादा चीजें जीएसटी से मुक्त हैं, अगर जरूरत हुई तो मैं उनकी सूची शेयर कर सकती हूं। इनका इस्तेमाल हर कोई करता है, खासकर गरीब और आम नागरिक। सीतारणम ने कहा कि सितंबर में हमने जीएसटी से मुक्त कैटेगरी में और भी कई चीजें शामिल कीं है। उन्होंने बताया कि दालें और अनाज जीएसटी से मुक्त हैं। ताजे फल और सब्जियां जीएसटी से से मुक्त हैं। आटा, मैदा और बेसन जीएसटी से मुक्त हैं। ताजी ब्रेड, गुड़ वगैरह ये सभी जीएसटी से मुक्त हैं।

 

इससे पहले वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में विचार और वापसी के लिए वित्त विधेयक, 2026 और विनियोग (सं. 2) विधेयक, 2026 दोनों विधेयक को एकसाथ पेश किया था। लोकसभा ने बुधवार को 32 सरकारी संशोधनों के साथ वित्त विधेयक 2026 पारित कर दिया था। राज्यसभा से वित्त विधेयक 2026 के पारित होने के साथ ही लोकसभा ने बजटीय अनुमोदन प्रक्रिया में अपनी भूमिका पूरी कर ली है।

 

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है, जो 31 मार्च को समाप्त हो रहे मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 7.7 फीसदी ज्यादा है, जो अगले वित्त वर्ष के लिए कुल पूंजीगत खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इसमें 44.04 लाख करोड़ रुपये के सकल कर राजस्व संग्रह और 17.2 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का प्रस्ताव है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के 4.4 फीसदी से कम है।

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