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जनगणना में बाधा डाली तो तीन साल तक जेल, यूपी सरकार ने जारी की अधिसूचना 

राघवेन्द्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया को औपचारिक स्वरूप देने की कवायद तेज हो गई है। शासन ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर मंडल से लेकर तहसील तक अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी। अधिसूचना में जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का खासतौर पर उल्लेख किया गया है। इसमें जनगणना में बाधा डालने या लापरवाही पर सजा का प्रावधान है। अधिसूचना के अनुसार अगर कोई जनगणना में बाधा डालता है तो उस पर 1000 रुपये तक जुर्माना और 3 साल तक जेल हो सकती है।

अधिसूचना के मुताबिक, कमिश्नर मंडल जनगणना अधिकारी, डीएम प्रमुख जनगणना अधिकारी और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) जिला जनगणना अधिकारी होंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी को अपर जिला जनगणना अधिकारी बनाया गया है। एसडीएम उप जनगणना अधिकारी, तहसीलदार चार्ज अफसर और कानूनगो सहायक चार्ज अफसर बनाए गए हैं। नगर निगम से लेकर औद्योगिक विकास प्राधिकरणों तक इसी तरह जवाबदेही तय की गई है।

गौरतलब है कि प्रदेश में मई-जून में हाउस सर्वे होना है। इसमें प्रगणक घर-घर जाएंगे और संसाधनों के बारे में जानकारी जुटाएंगे। इससे पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रक्रिया को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए मंडल, जिला, तहसील, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत, छावनी परिषद और औद्योगिक प्राधिकरणों में जनगणना संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सूची जारी की गई है।

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