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पिंक बॉल टेस्ट से इंग्लैंड का मोहभंग, अगली एशेज में डे-नाइट मैच खेलने से किया इनकार

ऑस्ट्रेलिया में खेली गई 5 मैचों की एशेज सीरीज इंग्लैंड के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। सीरीज में इंग्लैंड को 4-1 से करारी और शर्मनाक हार झेलनी पड़ी, जिसमें एकमात्र जीत भी टीम ने किसी तरह हासिल की थी।

इस पूरी सीरीज ने न सिर्फ इंग्लैंड की कमजोरी उजागर की, बल्कि पिंक बॉल टेस्ट की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए। इस एशेज सीरीज में एक टेस्ट मुकाबला पिंक बॉल से डे-नाइट फॉर्मेट में खेला गया था।

ब्रिसबेन के गाबा में हुआ यह दूसरा टेस्ट मैच इंग्लैंड के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां टीम पहले ही 0-1 से पीछे थी और इस हार के बाद सीरीज में 0-2 से पिछड़ गई। ऑस्ट्रेलिया ने इस डे-नाइट टेस्ट को पूरी तरह एकतरफा अंदाज में जीता।

अब इसी अनुभव के बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने बड़ा फैसला लेने का मन बना लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईसीबी आने वाली एशेज सीरीजों में डे-नाइट टेस्ट और पिंक बॉल के इस्तेमाल को लेकर संतुष्ट नहीं है।

साभार : गूगल

यही वजह है कि इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में होने वाली अगली एशेज सीरीज में फ्लडलाइट में पिंक बॉल टेस्ट खेलने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज करने की योजना बना ली है।

एशेज के बाद सीनियर अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में ईसीबी ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को 2029-30 की एशेज सीरीज के लिए अपना रुख साफ तौर पर बता दिया है।

इन चर्चाओं का मुख्य फोकस एशेज को एक “टॉप टेस्ट सीरीज” बनाए रखने पर था। दोनों बोर्ड इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं टेस्ट क्रिकेट अपना पारंपरिक आकर्षण न खो दे। अगर इसी तरह के असंतुलित और एकतरफा डे-नाइट टेस्ट होते रहे, तो यह टेस्ट क्रिकेट के भविष्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया मार्च 2027 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर एशेज के पहले टेस्ट की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक खास डे-नाइट टेस्ट खेलने वाले हैं।

इस ऐतिहासिक मुकाबले की योजना अगस्त 2024 में ही फाइनल हो चुकी थी। माना जा रहा है कि इस खास टेस्ट से पहले इंग्लैंड की टीम को एक वार्मअप मैच खेलने का मौका भी मिलेगा।

पिंक बॉल टेस्ट को लेकर आलोचना सिर्फ इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों ने भी यह माना है कि पिंक बॉल से खेले जाने वाले मैचों में रेड बॉल पर स्विच करने की जरूरत है।

उनका कहना है कि पिंक बॉल टेस्ट से भले ही ब्रॉडकास्टर्स को फायदा होता हो, लेकिन इससे खेल को उतना फायदा नहीं मिल रहा जितना उम्मीद की गई थी। डे-नाइट टेस्ट को आईसीसी ने साल 2015 में मंजूरी दी थी। उस समय उम्मीद की जा रही थी कि इससे ज्यादा फैंस टेस्ट क्रिकेट से जुड़ेंगे, लेकिन अब तक ऐसा होता नजर नहीं आया है।

इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने पिंक बॉल टेस्ट पर लगातार जोर दिया है। अब तक खेले गए 25 डे-नाइट टेस्ट मैचों में से 14 मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में हुए हैं। आंकड़े भी ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में झुके हुए हैं। पिंक बॉल से खेले गए 15 टेस्ट मैचों में से 14 मुकाबले ऑस्ट्रेलिया ने जीते हैं।

यही असंतुलन इंग्लैंड की चिंता की सबसे बड़ी वजह है। ब्रिसबेन में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट के बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट ने भी सवाल उठाया था कि क्या एशेज जैसी प्रतिष्ठित सीरीज में पिंक बॉल की वास्तव में जरूरत है?इंग्लैंड को अगली बार एशेज से पहले खूब वार्म-अप मैच मिलने वाले हैं।

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