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नोवाक जोकोविच का बड़ा फैसला, पीटीपीए से तोड़े सभी रिश्ते

सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच और उनके द्वारा सह-स्थापित संगठन प्रोफेशनल टेनिस प्लेयर्स एसोसिएशन (पीटीपीए) के बीच अब औपचारिक रूप से रास्ते अलग हो गए हैं।

जोकोविच ने खुद यह साफ किया है कि उन्होंने इस संस्था से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिसकी नींव उन्होंने कनाडा के खिलाड़ी वासेक पोस्पिसिल के साथ मिलकर रखी थी। जोकोविच के इस फैसले के पीछे संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताएं हैं।

उनके मुताबिक, पीटीपीए में पारदर्शिता और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे लगातार सामने आ रहे थे, साथ ही उनकी छवि को जिस तरह से पेश किया जा रहा था, वह भी उनके लिए असहज करने वाला था।

एक्स पर साझा किए गए बयान में जोकोविच ने लिखा कि काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने पीटीपीए से अलग होने का निर्णय लिया।

साभार : गूगल

उन्होंने कहा कि पीटीपीए की स्थापना के समय उनका और वासेक पोस्पिसिल का मकसद खिलाड़ियों को एकजुट और स्वतंत्र आवाज देना था, ताकि वे प्रोफेशनल टेनिस के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

हालांकि, जोकोविच ने यह भी स्पष्ट किया कि अब संगठन की मौजूदा दिशा उनके मूल्यों और सोच से मेल नहीं खाती। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि पीटीपीए के गठन के जरिए खिलाड़ियों को एक मजबूत मंच मिला, लेकिन मौजूदा हालात में वे खुद को इससे जुड़ा हुआ नहीं पाते।

जोकोविच ने आगे कहा कि अब उनका ध्यान अपने खेल, अपने परिवार और टेनिस के विकास में उन तरीकों से योगदान देने पर रहेगा, जो उनके सिद्धांतों और ईमानदारी को दर्शाते हों। उन्होंने संगठन और इससे जुड़े लोगों को आगे के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके लिए यह अध्याय अब समाप्त हो चुका है।

मार्च 2025 में पीटीपीए और कई खिलाड़ियों ने एटीपी, डब्ल्यूटीए, आईटीएफ और इंटरनेशनल टेनिस इंटीग्रिटी एजेंसी (आईटीआईए) समेत अन्य संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी। इस मुकदमे में इन संस्थाओं पर एंटीट्रस्ट उल्लंघनों के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

मुकदमे में कहा गया कि खिलाड़ियों को अपनी मेहनत और प्रदर्शन के अनुरूप अधिक कमाई का अधिकार मिलना चाहिए। आरोप है कि विंबलडन, यूएस ओपन, फ्रेंच ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन जैसे चारों ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के साथ-साथ अन्य पेशेवर टूर्नामेंटों का संचालन करने वाली संस्थाएं इनाम राशि पर सीमा तय करती हैं।

इससे खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि सीमित रह जाती है। इसके अलावा, नीतियों के कारण खिलाड़ियों को कोर्ट के बाहर अपनी कमाई बढ़ाने के अवसरों का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

वहीं, एटीपी और डब्ल्यूटीए ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दोनों संगठनों ने साफ कहा है कि वे अपने फैसलों और नीतियों को सही मानते हैं और कानूनी स्तर पर इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेंगे।

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