आदित्य-L1 ने सौर विस्फोटों के असमान विस्तार का लगाया पता, अंतरिक्ष मौसम के अध्ययन में मिलेगी मदद

नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह) :
भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला आदित्य-L1 ने सूर्य से निकलने वाले विस्फोटों यानी कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के विस्तार को लेकर अहम जानकारी दी है। आदित्य-L1 पर लगे विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) के आंकड़ों से वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि सौर विस्फोट का विस्तार सभी दिशाओं में एक समान नहीं होता, बल्कि इसका आकार असममित हो सकता है। इस खोज से अंतरिक्ष मौसम के अध्ययन और पृथ्वी पर उपग्रहों तथा संचार नेटवर्क पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को समझने में मदद मिल सकती है।
सीएमई का विस्तार सभी दिशाओं में एक समान नहीं
सितंबर 2023 में लॉन्च किया गया आदित्य-L1 फिलहाल सूर्य-पृथ्वी के एल1 बिंदु पर काम कर रहा है और लगातार सूर्य का अवलोकन कर रहा है। इसमें सात पेलोड लगे हैं, जिनमें VELC प्रमुख पेलोड है। यह सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना का अलग-अलग तरीकों से एक साथ अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के वैज्ञानिकों ने आदित्य-L1 के VELC से मिले आंकड़ों को नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) अंतरिक्ष यान के आंकड़ों और त्रि-आयामी मॉडलिंग के साथ मिलाकर सौर विस्फोट की संरचना और गति का अध्ययन किया। यह अध्ययन ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में पहली बार सामने आया कि सीएमई सूर्य से किसी सामान्य गोलाकार बुलबुले की तरह समान रूप से बाहर नहीं फैलता। इसके बजाय इसका विस्तार अलग-अलग दिशाओं में असमान होता है, जिससे इसका आकार असममित बन जाता है। विस्तार में यह अंतर पृथ्वी की ओर बढ़ते समय सीएमई की गति को प्रभावित कर सकता है और अंतरिक्ष मौसम में गड़बड़ी पैदा कर सकता है।
