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 गुरु पूर्णिमा कब है, जानें गुरुओं की वंदना करने का शुभ मुहूर्त और तरीका 

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में गुरु का स्थान बहुत ऊंचा होता है. गुरु को ज्ञान का प्रकाश माना जाता है. गुरु ही हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं. धार्मिक शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनायी जाती है. इस वर्ष  2024 में गुरु पूर्णिमा 21जुलाई को मनाई जाएगी. गुरु पूर्णिमा  का दिन गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है. इस दिन लोग अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार देते हैं, और उनके चरण स्पर्श करते हैं. गुरु पूर्णिमा का दिन ज्ञान और विद्या का दिन है. इस दिन लोग ज्ञान और विद्या प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं.

गुरु पूर्णिमा 2024 शुभ मुहूर्त 

इस साल गुरु पूर्णिमा, रविवार जुलाई 21 को मनायी जाएगी. पूर्णिमा तिथि जुलाई 20, 2024 को 05:59 पी एम बजे प्रारंभ हो जाएगी जो जुलाई 21, 2024 को 03:46 पी एम बजे तक रहेगी. उदयातिथि को देखते हुए  21 जुलाई को ही गुरु पूर्णिमा का त्योहार सेलिब्रेट होगा. 

हिंदू धर्म के लोगों के साथ-साथ ये दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है. उनका मानना है कि, गुरु पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध ने उत्तर प्रदेश के सारनाथ नामक स्थान पर अपना प्रथम उपदेश दिया था. 

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास की जयन्ती के रूप में भी गुरु पूर्णिमा मनायी जाती है और इसी कारण इस दिन तो व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. 

इस दिन सूर्योदय 05:37 ए एम बजे होगा और सूर्यास्त शाम को 07:18 पी एम बजे होगा. ब्रह्म मुहूर्त 04:14 ए एम से 04:55 ए एम तक है और अभिजित मुहूर्त 12:00 पी एम से 12:55 पी एम बजे तक रहेगा. तो आप अपने गुरु के लिए कुछ खास करने के बारे में सोच रहे हैं तो इस समय को ध्यान में रख सकते हैं. 

गुरु पूर्णिमा  के दिन विश्वभर में हिंदू धर्म के अनुयायी कुछ प्रमुख कार्यक्रम करते हैं. इस दिन लोग अपने गुरुओं की पूजा करते हैं. पूजा में गुरु की प्रतिमा को फूल, माला, दीप, धूप, नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं. गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गुरु वंदना का पाठ किया जाता है. गुरुओं को दक्षिणा अर्पित की जाती है और गुरु ज्ञानदान करते हैं और शिष्य ज्ञान ग्रहण करते हैं. इस दिन खासतौर पर गुरु सत्संग करते हैं और शिष्य उनका सत्संग सुनते हैं. गुरु पूर्णिमा  का त्योहार हमें गुरुओं  के महत्व को याद दिलाता है.  ये हमें सिखाता है कि हमें हमेशा अपने गुरुओं का सम्मान करना चाहिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.

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