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वैश्विक कूटनीति का बड़ा मंच

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को आएंगे भारत, BRICS शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

बदलते वैश्विक समीकरणों और पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। रूस के राष्ट्रपति भवन ‘क्रेमलिन’ (Kremlin) ने आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS (ब्रिक्स) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। इस दौरे पर पूरी दुनिया, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की कड़ी नज़र रहेगी।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध के बाद, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अंतरराष्ट्रीय यात्राएं बेहद सीमित हो गई थीं। लेकिन भारत के साथ रूस की ऐतिहासिक और ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ को देखते हुए, क्रेमलिन ने उनके नई दिल्ली दौरे की आधिकारिक घोषणा कर दी है। 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की अध्यक्षता में होने जा रहे BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य नए सदस्य) शिखर सम्मेलन में पुतिन की यह व्यक्तिगत उपस्थिति कई कूटनीतिक मायने रखती है।

भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
इस शिखर सम्मेलन के इतर (Sidelines), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Talk) भी तय है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस वार्ता में दोनों नेता कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इनमें मुख्य रूप से रियायती दरों पर कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति, एस-400 (S-400) मिसाइल रक्षा प्रणाली की शेष खेप की जल्द डिलीवरी, और रुपये-रूबल (Rupee-Ruble) व्यापार तंत्र को और अधिक मजबूत करने जैसे विषय शामिल हैं।

पश्चिमी देशों के लिए स्पष्ट कूटनीतिक संदेश
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देश रूस को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग (Isolate) करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर अन्य वैश्विक मंचों पर एक स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष नीति अपनाते हुए हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए युद्ध समाप्त करने की वकालत की है। पुतिन का भारत आना यह स्पष्ट संदेश देता है कि बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में भारत एक ऐसा प्रमुख देश है, जो अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने हितों के अनुसार बेहतरीन संबंध बनाए रखने में सक्षम है।

BRICS के विस्तार और डी-डॉलराइजेशन पर चर्चा
इस बार का BRICS शिखर सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को कम करने (De-dollarization) और सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर कोई ठोस रूपरेखा तैयार की जा सकती है। इसके अलावा, ब्रिक्स संगठन में नए सदस्य देशों को शामिल करने और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को बुलंद करने पर भी व्लादिमीर पुतिन और भारतीय नेतृत्व के बीच गहन मंथन होगा। इस दौरे से भारत-रूस मित्रता का एक नया अध्याय शुरू होने की पूरी संभावना है।

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