महंगाई का जोरदार झटका: पेट्रोल 87 और डीजल 91 पैसे हुआ महंगा
मात्र 10 दिनों के भीतर आम आदमी पर तीसरी बार गिरी गाज

देश में महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों को एक बार फिर बड़ा आर्थिक झटका लगा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का सीधा उछाल आया है। चिंता का विषय यह है कि पिछले मात्र 10 दिनों के भीतर यह लगातार तीसरी बार है जब तेल की कीमतों में इस तरह का इजाफा किया गया है, जिसने आम आदमी के घरेलू बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।
महीने के अंत में जब आम नौकरीपेशा इंसान का बजट वैसे ही तंग रहता है, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी ने जनता की कमर तोड़ दी है। आज सुबह 6 बजे से देशभर के पेट्रोल पंपों पर नई और बढ़ी हुई दरें लागू कर दी गई हैं। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे की वृद्धि दर्ज की गई है।
10 दिनों में तीसरी बार बढ़ा आर्थिक बोझ
यह बढ़ोतरी कोई सामान्य घटना नहीं है, क्योंकि यह एक सिलसिलेवार वृद्धि का हिस्सा है। पिछले 10 दिनों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो तेल कंपनियों ने यह तीसरी बार आम जनता की जेब पर कैंची चलाई है। यदि इन तीनों कटौतियों (बढ़ोतरी) को मिला दिया जाए, तो पिछले एक पखवाड़े में ही पेट्रोल और डीजल लगभग 2.50 रुपये से लेकर 3 रुपये तक महंगे हो चुके हैं। इस अप्रत्याशित वृद्धि ने वाहन चालकों और विशेषकर मध्यम वर्ग को भारी निराशा में डाल दिया है।
आखिर क्यों लग रही है कीमतों में आग?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस मूल्य वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आ रहा भारी उछाल है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह बाधित हुई है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति में उतार-चढ़ाव ने भी तेल आयात को काफी महंगा कर दिया है। तेल कंपनियां इसी घाटे की भरपाई अब सीधे उपभोक्ताओं से कर रही हैं।
माल ढुलाई और आवश्यक वस्तुओं पर पड़ेगा सीधा असर
इस बढ़ोतरी का सबसे भयानक पहलू यह है कि इसका असर केवल निजी वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल के 91 पैसे महंगे होने का सीधा अर्थ है—माल ढुलाई (Freight) और परिवहन (Transportation) लागत में भारी वृद्धि। देश में 80 प्रतिशत से अधिक फल, सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं ट्रकों और मालवाहक वाहनों के माध्यम से ही एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंचती हैं। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टर अपना किराया बढ़ाएंगे, जिसका सीधा असर मंडियों में सब्जियों और राशन के दामों पर पड़ेगा।
आम जनता की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
लगातार बढ़ रही इस महंगाई को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया से लेकर पेट्रोल पंपों तक लोग सरकार से हस्तक्षेप करने की गुहार लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और राज्य सरकारों को मूल्य वर्धित कर (VAT) में कटौती करनी चाहिए ताकि जनता को कुछ राहत मिल सके। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और इसे “जनता की जेब पर सीधा डाका” करार दिया है। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में सरकार आम आदमी को इस महंगाई से कोई राहत देती है या नहीं।



