जब लगा सब खत्म हो गया, तब चेतन सकारिया ने फिर से गेंद थामी
एक समय था जब चेतन सकारिया को भारत के सबसे भरोसेमंद उभरते हुए तेज गेंदबाजों में गिना जाता था। तीन साल पहले तक उनका नाम भविष्य के विकल्पों में शामिल था, लेकिन लगातार चोटों ने उनके करियर की रफ्तार को अचानक रोक दिया।
आज स्थिति यह है कि वे आईपीएल फ्रेंचाइज़ियों की मौजूदा योजनाओं का हिस्सा भी नहीं हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वही चोटें रहीं, जिन्होंने उनके करियर की शुरुआत में ही उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर कर दिया।
लगातार चोटिल रहने और लंबे ब्रेक के बाद एक दौर ऐसा भी आया जब सकारिया को खुद लगने लगा था कि शायद वे फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों के लिए आईपीएल खेलने वाले इस गेंदबाज के लिए यह सोच बेहद निराशाजनक थी।
हालांकि, मौजूदा घरेलू सत्र में उन्होंने वापसी की एक झलक दिखाई। सौराष्ट्र की ओर से विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने एक मैच खेला, जो फरवरी 2024 के बाद उनका पहला प्रतिस्पर्धी मुकाबला था। इस वापसी ने उनके भीतर फिर से उम्मीद जगाई।

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में सकारिया ने कहा, “जब मुझे चोट लगी थी तो मुझे लगा था कि मैं कभी वापसी नहीं कर पाऊंगा। अब इस घरेलू सत्र में खेलकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। सौराष्ट्र के लिए गेंदबाजी करने के बाद बहुत अच्छा लग रहा है।”
बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज के बाएं हाथ की कलाई में 2024 की शुरुआत में चोट लगी थी, जिससे उबरने में उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा समय लगा। शारीरिक दर्द से ज्यादा यह दौर मानसिक रूप से थका देने वाला था।
सकारिया ने स्वीकार किया, “यह मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण था। मुझे विश्वास नहीं था कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल पाऊंगा। कुछ डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि शायद मैं दोबारा गेंद को ठीक से पकड़ भी न पाऊं। यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था, क्योंकि मैं खुद पर भरोसा नहीं कर पा रहा था।”
मैदान से बाहर की परेशानियां भी कम नहीं थीं। वर्ष 2021 में उनके पिता और छोटे भाई का निधन हो गया था। निजी जीवन की इस गहरी त्रासदी ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया। 27 वर्षीय इस खिलाड़ी का मानना है कि उस उथल-पुथल भरे समय ने उन्हें जीवन और करियर की असफलताओं से जूझना सिखाया।
उन्होंने कहा, “मेरे जीवन में जो परिस्थिति आई, वह अप्रत्याशित थी। अगर मैं क्रिकेटर नहीं होता तो मुझे नहीं लगता कि मैं दोबारा वास्तविक ज़िंदगी में लौट पाता। अब मुझे लगता है कि अगर मेरी ज़िंदगी में फिर कभी कोई मुश्किल हालात आते हैं तो मैं उनका सामना करने के लिए तैयार हूं। मुझे पता है कि मुझे क्या करना है।”
अब जबकि सकारिया घरेलू क्रिकेट में फिर से सक्रिय हो गए हैं, उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है। वे जानते हैं कि भारतीय टीम में वापसी आसान नहीं होगी। अब तक वे भारत के लिए एक वनडे और दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, लेकिन आगे का रास्ता कड़ी मेहनत और निरंतर सुधार से होकर गुजरता है।
इस पर उन्होंने साफ कहा, “मुझे अब भी लगता है कि मैं राष्ट्रीय टीम में जगह बना सकता हूं, लेकिन उसके लिए मुझे कड़ी मेहनत करनी होगी।
मुझे अपनी तकनीक पर काम करना होगा ताकि मैं लय हासिल कर सकूं। लेकिन मैं अपने खेल में दिन-प्रतिदिन सुधार कर रहा हूं और यह मेरे लिए सकारात्मक बात है।”



