राजस्थान निकाय चुनाव: दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को राहत संभव, चुनावी नियम बदलने की तैयारी

राघवेंद्र प्रताप सिंह: राजस्थान की राजनीति और स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा एक अहम अपडेट सामने आया है। दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। नगर पालिका अधिनियम में संशोधन के लिए तैयार प्रस्ताव को प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी दे दी गई है। इससे आगामी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले नियम बदलने की संभावना मजबूत हो गई है।
विधानसभा तक पहुंचेगा संशोधन प्रस्ताव :
पंचायत और शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। अब यह फाइल विधि विभाग को भेजी जाएगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद संशोधित प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और फिर विधानसभा में पेश किया जाएगा। यदि विधानसभा से मंजूरी मिल जाती है, तो मौजूदा नियमों में बदलाव लागू हो सकता है।
वर्तमान में नगर पालिका अधिनियम की धारा-24 के तहत यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक बच्चे हैं, तो वह बोर्ड का सदस्य या अध्यक्ष नहीं बन सकता। इसी प्रावधान को संशोधित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे अब आगे की प्रक्रिया में भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि बीते नवंबर में ही संकेत मिल चुके थे कि राज्य सरकार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम और नगर निगम अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों पर लगी अयोग्यता को हटाने की कोशिश की जा रही है।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, यदि 27 नवंबर 1995 के बाद किसी व्यक्ति का तीसरा बच्चा जन्म लेता है, तो वह पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है। पंच, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति और महापौर जैसे पद इस नियम के अंतर्गत आते हैं।



