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केरल में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद तमिलनाडु में अलर्ट

सरिता त्रिपाठी: केरल में एवियन इंफ्लूएंजा (एच1एन1) की दस्तक के बाद तमिलनाडु के जनस्वास्थ्य विभाग ने दोनों राज्यों की सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है और बचाव संबंधी उपायों का आदेश जारी कर दिया है। हाल ही में केरल के अलाप्पुझा और कोट्टायम जिलों से पोल्ट्री फार्म्स के मुर्गे-मुर्गियों के अचानक मरने की खबर आई थी। इसके बाद केरल के पशुपालन विभाग ने मृत मुर्गे-मुर्गियों के खून के नमूने पुणे की एक लैब में भेजे, जहां जांच में एच1एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई। इसके बाद ही तमिलनाडु में जरूरी निर्देश जारी किए गए। वहीं, केरल सरकार ने प्रकोप वाले इलाकों में जरूरी उपायों को अपनाने पर जोर दिया है।

बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza) एक संक्रामक रोग है जो प्रमुख रूप से पाया जाता है। इन्फ्लुएंजा A वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन से होता है, जिनमें सबसे खतरनाक H5N1, H5N8 और H7N9 हैं। ये वायरस मुर्गी, बत्तख, कौवे, कबूतर जैसे पक्षियों में तेजी से फैलता है और लाखों पक्षियों की मौत का कारण बनता है।
कभी-कभी, बर्ड फ्लू संक्रमित जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। आम तौर पर लोगों को होने वाले फ्लू की तरह, बर्ड फ्लू भी आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। इसका एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलना बहुत दुर्लभ है।

अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू के अलग-अलग लक्षण होते हैं। उपचार की अवधि स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करती है, उसी आधार पर डॉक्टर उपचार शुरू करते है।
ज़्यादातर मामलों में, ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू) या ज़ानामिविर (रेलेंज़ा) जैसी एंटीवायरल दवाओं से इलाज से बीमारी की गंभीरता कम हो सकती है। हालाँकि, लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर दवा लेना ज़रूरी है।

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