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आंध्र प्रदेश में आदिवासी अस्पतालों में ड्रोन पहुंचाएगा दवा

 राघवेंद्र प्रताप सिंह: आंध्र प्रदेश सरकार दूरस्थ आदिवासी अस्पतालों में ड्रोन के माध्यम से दवा और रक्त पहुंचाने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकार ने एक निजी संगठन के साथ समझौता किया है। यह सेवा जनवरी से शुरू हो सकती है और 60 से 80 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को कवर करेगी। आंध्र प्रदेश सरकार दूरस्थ आदिवासी अस्पतालों में ड्रोन से दवा व रक्त पहुंचाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने गुरुवार को एक निजी संगठन के साथ समझौता किया। अल्लूरी सीताराम राजू जिले का पाडेरू मंडल इस पहल का केंद्र होगा। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के आयुक्त जी वीरपांडियन ने बयान जारी कर कहा कि ड्रोन आधारित चिकित्सा आपूर्ति सेवा संचालित करने के लिए ‘रेड विंग’ के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

ड्रोन सेवाएं 60 से 80 किलोमीटर के दायरे में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को सेवाएं प्रदान करेंगी, जिनमें ‘कोल्ड चेन’ सुविधाओं से युक्त और लगभग दो किलोग्राम की क्षमता वाले ड्रोन शामिल होंगे। जनवरी से यह सेवा शुरू हो सकती है।

आपको बता दें कि पूर्वोत्तर भारत में, खासकर मेघालय और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में, दुर्गम और पहाड़ी इलाकों तक दवाइयाँ पहुँचाने के लिए ड्रोन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति आई है; ये ड्रोन जीवन रक्षक दवाएं, टीके और रक्त के नमूने तेज़ी से पहुँचाते हैं, घंटों का समय बचाते हैं, और स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करते हैं, जिससे दूरदराज के गाँवों और संकटग्रस्त क्षेत्रों के लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल पाती है।

मेघालय देश का पहला राज्य जिसने ड्रोन से दवा डिलीवरी शुरू की थीं, जहाँ 25 मिनट में 25 किलोमीटर दूर गाँव तक दवाएँ पहुँच गईं थीं। वहीं अरुणाचल प्रदेश के टोमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (TRIHMS) में एक ड्रोन पोर्ट का उद्घाटन हुआ, जिससे पहाड़ों तक दवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। पूर्वोत्तर में ड्रोन तकनीक स्वास्थ्य सेवा को सुलभ बनाने और समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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