Trending

आगरा में तीसरे संसद खेल महोत्सव में युवाओं से अपील

 

लखनऊ/ राघवेन्द्र प्रताप सिंह:  संसद खेल महोत्सव आगरा में 21 से 25 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। पांच दिनों के इस महोत्सव के दौरान 33 से अधिक टीम और व्यक्तिगत खेल प्रतिस्‍पर्धाओं में हजारों निवासी भाग ले रहे हैं। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने 24 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में आयोजित तीसरे संसद खेल महोत्सव में मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लिया। यह आयोजन युवा खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की उत्साहजनक भागीदारी से जमीनी स्‍तर की बढ़ती खेल संस्कृति को दर्शाता है।

युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की चुनौती पर उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि खेल, नशामुक्त भारत के निर्माण के सबसे प्रभावी उपायों में से एक हैं। उन्होंने युवाओं से नशीली दवाओं को ना कहने और खेलों को हां कहने का आह्वान किया। उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ और सक्रिय युवा ही एक मजबूत राष्ट्र का आधार है। महानगरों से बाहर खेलों को बढ़ावा देने के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए श्री राधाकृष्णन ने पिछले 11 वर्षों में भारत के खेल तंत्र में आए संरचनात्मक बदलाव का उल्‍लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और स्वदेशी खेलों को समर्थन दिए जाने जैसी पहल राष्ट्र के विकास का समग्र दृष्टिकोण दर्शाती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के प्राचीन ज्ञान ने हमेशा मन और शरीर के तालमेल को महत्व दिया है। उन्होंने खेलों को केवल प्रतिस्पर्धी गतिविधियों की बजाय, चरित्र निर्माण का शक्तिशाली साधन बताया, जो अनुशासन, दृढ़ता, समूह भावना और नियमों का सम्मान जैसे मूल्य विकसित करते हैं। ये गुण व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं। श्री राधाकृष्‍णन ने कहा कि संसद खेल महोत्सव जैसे आयोजन की जमीनी स्तर पर इन मूल्यों को पोषित करने में अहम भूमिका है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में संसद खेल महोत्सव का हिस्सा बनने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की। खेलों से अपना व्यक्तिगत जुड़ाव साझा करते हुए उन्‍होंने स्कूल-कॉलेज के दिनों में खेलों में अपनी उत्साहपूर्वक भागीदारी और टेबल टेनिस में कॉलेज चैंपियन रहने का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने बताया कि लंबी दूरी की दौड में भी उन्‍होंने हिस्‍सा लिया है और क्रिकेट तथा वॉलीबॉल जैसे खेलों में उनकी रूचि रही है। श्री राधाकृष्‍णन ने शारीरिक चाक-चौबंद और मानसिक दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि खेल पृष्‍ठभूमि से ही उन्‍हें कठिन पदयात्रा और 19 हजार किलोमीटर की रथयात्रा करने में मदद मिली।

Related Articles

Back to top button